अब सस्पेंड शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा ने दी उत्तराखंड सरकार को ये चेतावनी
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जनता मिलन कार्यक्रम में हंगामा और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने वाली शिक्षिका उत्तरा पंत का शुक्रवार को निलंबन आदेश जारी हो गया।
वहीं, उत्तरा पंत ने सरकार के निर्णय के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। शुक्रवार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) केएस चौहान ने उत्तरा पंत बहुगुणा का निलंबन आदेश जारी किया।
साथ ही निलंबन अवधि के लिए उन्हें उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय नौगांव से अटैच कर दिया गया है। आदेश के अनुसार बिना विभागीय अनुमति के मुख्यमंत्री जनता मिलन कार्यक्रम में हिस्सा लेने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
सोशल मीडिया पर चल रही एक ख़बर के मुताबिक़ एक आरटीआइ में ख़ुलासा हुआ है कि सीएम रावत की पत्नी पिछले 22 साल से सुगम देहरादून में सेवाएं दे रही हैं। 22 साल से उनका किसी दूसरी जगह ट्रांसफर तक नहीं हुआ है। सबसे बड़ी बात ये कि प्रमोशन मिलने के बाद भी त्रिवेंद्र रावत की पत्नी का ट्रांसफर नहीं किया गया है।
उत्तराखंड में राम राज्य तो मैं यहां की सीता
निलंबन के कारण अलग-अलग
मुख्यमंत्री के जनता मिलन कार्यक्रम में हंगामा करने वाली शिक्षिका उत्तरा पंत को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। उत्तरकाशी के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बेसिक केएस चौहान ने निलंबन आदेश में लिखा है कि बिना अनुमति के मुख्यमंत्री जनता दरबार में शामिल होने और अभद्रता करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
वनवास झेल लिया, अब अग्निपरीक्षा भी दूंगी
मुख्यमंत्री के जनता मिलन कार्यक्रम में मुझ पर हंगामा करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। लेकिन यह नहीं देखा जा रहा कि आखिर इसकी नौबत क्यों आई। 2015 में पति की मौत के बाद एक शिक्षिका होने के नाते मैंने विभागीय अधिकारियों से तबादले की अपील की। इसके बाद सीएम से मिली। जनता मिलन में करीब पांच माह बाद दोबारा सीएम के सामने अपना पक्ष रखा तो उन्होंने बहुत ही गलत ढंग से जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक सभा में मुझ पर तंज कसा, जिससे मुझे गुस्सा आया। सीएम ने मुझे गिरफ्तार करने और बाहर निकालने के आदेश दिए। मुझे खींचकर और धक्के मारकर बाहर निकाला गया। क्या यही महिलाओं के सम्मान का दावा करने वाली सरकार का असली चेहरा है। कहा जा रहा है कि उत्तराखंड में राम राज्य आ गया है। अगर उत्तराखंड में राम राज्य है तो मैं सीता हूं। सीता ने वनवास झेला और फिर अग्निपरीक्षा दी। पति और परिवार से वर्षों दूर रहकर मैंने भी वही वनवास झेला है। अब सरकार के आरोपों की अग्निपरीक्षा दे रही हूं। सरकार मुझे निलंबित करे या नौकरी से निकाल दे। मेरी लड़ाई जारी रहेगी। मेरे लिए कोर्ट का विकल्प भी खुला है। जरूरत पड़ी तो कोर्ट में जाकर अपनी लड़ाई लड़ूंगी।
-उत्तरा पंत बहुगुणा
स्कूल से एक साल से नदारद हैं प्रधानाध्यापिका उत्तरा
देहरादून में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में हंगामा काटने वाली शिक्षिका पिछले एक साल से अपने विद्यालय से बिना छुट्टी लिए नदारद हैं। शासन से मिले निर्देश के बाद शुक्रवार को प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उक्त शिक्षिका का निलंबन आदेश जारी कर उसे जांच पूरी होने तक उपखंड शिक्षा अधिकारी (एसडीईओ) कार्यालय नौगांव से संबद्ध किया है। इस मामले की जांच उपखंड शिक्षा अधिकारी नौगांव को सौंपी गई है।
शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा की प्रथम नियुक्ति वर्ष 1993 में उत्तरकाशी के मोरी ब्लाक स्थित प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। एक साल बाद उनका तबादला चिन्यालीसौड़ ब्लाक में सड़क मार्ग से दूर धुनियारा बेसिक स्कूल में हो गया था। इस विद्यालय में करीब आठ साल की सेवाओं के बाद वर्ष 2002 में उनका तबादला दुगड़ा जगड़गांव बेसिक स्कूल में हो गया। इस विद्यालय में छात्र संख्या शून्य होने पर उन्हें वर्ष 2015 में नौगांव ब्लाक के बेसिक स्कूल जेष्टवाड़ी में प्रधानाध्यापिका के पद पर समायोजित कर दिया गया। 2 जुलाई 2015 को यहां कार्यभार ग्रहण करने के बाद शिक्षिका के पति का देहांत होने के कारण वे 3 अगस्त को अवकाश पर चली गई थीं। इसके बाद उन्होंने 11 मई 2017 को दुबारा कार्यभार संभाला। इसके बाद 6 जुलाई को वे तीन दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर छुट्टी पर गई और तब से स्कूल में नहीं लौटी हैं। बेसिक स्कूल जेष्टवाड़ी में वर्तमान में 11 बच्चे पढ़ते हैं। प्रधानाध्यापिका की गैरहाजिरी में इनकी जिम्मेदारी एक शिक्षक पर है। शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि उक्त शिक्षिका की मेडिकल आदि सभी तरह की छुट्टियां समाप्त हो चुकी हैं।