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नौकरी में आरक्षण का इंतजार करते रह गए बेरोजगार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 26 Feb 2017 08:04 PM IST
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उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को नौकरी में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण संबंधी गैरसैण विधानसभा सत्र के प्रस्ताव के बावजूद इसका लाभ नहीं मिल पाया है। हाल यह हैं कि विभिन्न विभागों में आवेदन के बाद भी बेरोजगार नियुक्ति का इंतजार ही करते रह गए।
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राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को नौकरी में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाना था। इसके लिए दो नवंबर 2015 को गैरसैंण में विधानसभा सत्र में आए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, जल संस्थान, वन आदि विभिन्न विभागों में आरक्षण का यह मामला शासन की फाइलों से बाहर नहीं आ पाया है।
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उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन सम्मान परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप के मुताबिक विधानसभा सत्र में प्रस्ताव को मंजूरी के बाद इसे राजभवन भेजा गया, लेकिन न तो इस प्रस्ताव में अब तक हस्ताक्षर हुए न ही यह राजभवन से लौटकर आया। यही वजह है कि पांच हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है।
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नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण के मसले पर पूर्ववर्ती नारायण दत्त तिवारी सरकार में शासनादेश जारी हुआ था, लेकिन इस जीओ को कोर्ट में चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी, मामले की सुनवाई अब 16 मार्च को होनी है।
- मनमोहन लखेड़ा, आंदोलनकारी
बेरोजगार चार साल से कर रहे रिजल्ट का इंतजार
शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी के पदों के 3089 पदों के लिए फरवरी 2014 में आवेदन मांगे गए थे, आवेदन मांगे जाने के बाद उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से परीक्षा कराई गई। परिषद 90 फीसदी पदों पर परीक्षा परिणाम घोषित कर चुका है, लेकिन राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत पदों पर नौकरी के मसले में पेंच फंसा होने से अब तक शेष पदों पर परिणाम जारी नहीं हो पाए हैं।