उत्तराखंड: नियम विरुद्ध नियुक्ति का मामला खुलते ही विधानसभा अध्यक्ष के बेटे ने दिया इस्तीफा
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विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल के बेटे की उपनल में नियम विरूद्ध नियुक्ति का मामला खुलने के बाद उनके बेटे ने अभियंता पद से इस्तीफा दे दिया है। सोमवार को स्पीकर अग्रवाल ने प्रेस वार्ता कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, जल संस्थान में एई के पद अस्थाई रखा गया है।
वो शिक्षित होनहार युवा है, आउटसोर्सिंग से उसे काम मिला है। मेरा 38 साल का राजनीतिक जीवन रहा है, बेटे के इस नोकरी में मेरा कोई रोल नही है। मेरे प्रभाव का कोई इस्तेमाल नही किया गया। इसके बावजूद उसे नोकरी मिली।
लेकिन मीडिया में चली खबरो से आहत हुआ हूँ। मेरी और मेरे बेटे की छवि को खराब करने का काम किया गया है। बताया कि बेटे ने दो दिन पहले उपनल में जाकर इस्तीफा दे दिया है।
ये था पूरा मामला
बता दें कि, पूर्व सैनिकों या उनके आश्रितों को नियुक्ति देने के लिए बनाई गई संस्था उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लि. (उपनल) से विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे पीयूष को नियम विरुद्ध तरीके से नौकरी दी गई थी।
अमर उजाला ने इस मामले को शनिवार को इस मामले को प्रकाशित किया था। सामने आया था कि, इसके बाद उन्हें जल संस्थान में सहायक अभियंता के पद पर तैनाती मिली थी। गैर सैनिक परिवारों से जुड़े लोगों की नियुक्ति पर रोक के बावजूद ऐसा कैसे संभव हुआ? नियमों की अनदेखी क्यों की गई? ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब कोई देने को तैयार नहीं है। मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते उपनल और जल संस्थान के अफसर जानकारी होने से ही इंकार कर रहे हैं।
पीयूष अग्रवाल की जल संस्थान के पित्थूवाला जोन में सहायक अभियंता के पद पर तैनाती के बाबत पित्थूवाला जोन के अधिशासी अभियंता नमित रमोला की ओर से बीती 28 फरवरी को आदेश जारी किए गए। उक्त आदेश में पीयूष का कार्यकाल 31 मार्च 2019 तक होने की बात भी लिखी गई है।
गैरसैनिक होने के बावजूद नियुक्त हुए तीनों का अनुबंध रद्द
गैरसैनिक होने के बावजूद प्रभाव में की गईं विधानसभा अध्यक्ष के बेटे पीयूष अग्रवाल सहित तीन लोगों की नियुक्तियों का अनुबंध उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) ने सोमवार को रद्द कर दिया है। नके अलावा, सुमित कुमार को रायपुर और संदीप कुमार को देवप्रयाग में उपनल के माध्यम से नौकरी पर रखा था। ये तीनों नियुक्तियां गैर सैन्य पृष्ठभूमि वालों की थीं।
प्रदेशभर में इन नियुक्तियों को लेकर चल रहे विरोध के चलते उपनल ने यह कदम उठाया है। इसके साथ ही उपनल ने शासन की ओर से वर्ष-2016 में गैर सैन्य पृष्ठभूमि की भर्तियों पर लगाई रोक के बाद की सभी भर्तियों की जांच भी बैठा दी है। विधानसभा अध्यक्ष ने बेटे के मामले में दावा किया कि उसने तीन दिन पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।