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लद्दाख में शहीद बेटे के पार्थिव शरीर के इंतजार में पथराईं परिजनों की आंखें, अब बुधवार को पहुंचेगा शव

Mon, 20 Jul 2020 09:46 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, लालपुर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, लालपुर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 20 Jul 2020 09:46 PM IST
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Uttarakhand Soldiers Martyred In Ladakh:  Today the funeral will be done in ancestral village
शहीद जवान देव बहादुर - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

लद्दाख में शहीद देव बहादुर थापा का पार्थिव शरीर ग्राम गौरीकला स्थित उसके घर नहीं पहुंच सका है। शहीद बेटे के शव के इंतजार में परिजनों की आंखें पथरा गई हैं। परिजन शव के अंतिम दर्शनों के लिए बेचैन हैं, लेकिन उनका इंतजार अभी दो दिन और खिंचने वाला है। सेना की ओर से शहीद का शव बुधवार को गांव पहुंचने की सूचना परिजनों को दी गई है। इधर, शहीद के गांव में मातम और सन्नाटा है। परिजनों के साथ ग्रामीण भी शव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। 

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बता दें कि किच्छा के ग्राम गौरीकला निवासी देव बहादुर थापा वर्ष 2016 में गोरखा रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। शनिवार को लद्दाख में पेट्रोलिंग करते समय जमीन में बिछी माइंस में हुए विस्फोट की चपेट में आकर देव बहादुर (24) शहीद हो गए थे। सोमवार को देव के शव का गांव में पहुंचने की संभावना थी। दो दिन से रो-रोकर परेशान परिजन भी शव का इंतजार कर रहे थे, लेकिन शव गांव में नहीं पहुंच सका।
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परिजनों ने बताया कि अधिकारियों की ओर से कोई ठोस सूचना नहीं दी जा रही है। इधर, शहीद देव बहादुर के भाई किशन बहादुर को दोपहर में आर्मी हेड ऑफिस से सूचना दी गई कि देव बहादुर का पार्थिव शरीर मंगलवार को दिल्ली लाया जाएगा और सैन्य अधिकारी शव को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद शव बुधवार की सुबह गांव पहुंचाया जाएगा। इधर, दिनभर देव बहादुर के घर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा। आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों ने देव के आवास पर पहुंचकर परिजनों के सांत्वना दी।

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शहीद के नाम पर होगा स्कूल का नाम, बनाएंगे स्टेडियम: पांडेय

प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे और पूर्व सांसद बलराज पासी सोमवार को शहीद देव बहादुर के गांव गौरीकलां पहुंचे और परिजनों को ढांढस बढ़ाया। पांडे ने कहा कि सरकार शहीद के परिजनों के साथ खड़ी है। देश की रक्षा में कुर्बान होकर देव बहादुर ने प्रदेश के गौरव को बढ़ाया है और इस बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है।

उन्होंने गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने का आश्वासन दिया। इसके अलावा गांव के पास देव बहादुर के नाम से स्टेडियम बनाने का भी भरोसा दिलाया। पासी ने शहीद को नमन करते हुए कहा कि देव बहादुर की शहादत देश की अखंडता के लिए कुर्बानी है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ ने भी गौरीकलां पहुंच कर शहीद के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना जताई। 

शहीद के घर में नहीं जला चूल्हा 
शहीद देव बहादुर के घर पुत्र के पार्थिव शरीर के इंतजार में चूल्हा नहीं जला है। मां लक्ष्मी देवी, बहन गीता व छोटा भाई अनुज का रो- रोकर बुरा हाल है। पड़ोस की महिलाएं उन्हें संभाल रही हैं। उनके समझाने का प्रयास करके थोड़ा बहुत खाना खिला रही है। बहन गीता विलाप करते करते हुए बार-बार कह रही है कि इस बार रक्षाबंधन में कैसे भाई को राखी बांधूंगी।

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