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Uttarakhand: छह साहित्यकारों को मिला उत्तराखंड दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान, सीएम धामी ने किया सम्मानित

Sun, 14 Sep 2025 09:14 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 14 Sep 2025 09:14 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से राज्य के बिखरे हुए साहित्य को संरक्षित, संकलित और पुनर्स्थापित करने के लिए ठोस कार्य कर रही है।

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Uttarakhand: Six litterateurs received Uttarakhand Long Term Literary Service Award, CM Dhami honored them
उत्तराखंड दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के छह साहित्यकारों को उत्तराखंड दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भाषा संस्थान की ओर से आईआरडीटी सभागार में आयोजित समारोह में इन साहित्यकारों को सम्मानित किया। साहित्यकार शैलेश मटियानी, गिरीश तिवारी, शेरदा अनपढ़, हीरा सिंह राणा, सोमवारी लाल उनियाल और अतुल शर्मा को यह सम्मान मिला।

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समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड भाषा संस्थान के माध्यम से राज्य के बिखरे हुए साहित्य को संरक्षित, संकलित और पुनर्स्थापित करने के लिए ठोस कार्य कर रही है। स्थानीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण के लिए भी सतत प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध भाषायी विरासत से जुड़ी रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों की ओर से सौंपी गई साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत केवल हमारे अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी पहचान और सभ्यता की नींव हैं, इसलिए इन्हें संरक्षित रखना हम सभी का नैतिक उत्तरदायित्व है।
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मुख्यमंत्री ने साहित्यकार शैलेश मटियानी, गिरीश तिवारी, शेरदा अनपढ़, हीरा सिंह राणा को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके साथ ही सोमवारी लाल उनियाल व अतुल शर्मा को भी उत्तराखंड दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, शिवानी, शैलेश मटियानी, गिर्दा, शेर दा ‘अनपढ़’, और ‘हिरदा’ जैसे रचनाकारों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया, जिसने उत्तराखंड के जीवन, संघर्ष और संस्कृति को अपनी रचनाओं में जीवंत किया। उन्होंने कहा, समकालीन रचनाकारों में अतुल शर्मा, प्रसून जोशी, और उनियाल जैसे साहित्यकार इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
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प्रदेश में स्थापित होंगे दो साहित्य ग्राम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, प्रदेश में दो साहित्य ग्राम स्थापित किए जाएंगे। जिसमें एक गढ़वाल और एक कुमाऊं मंडल में होगा। जिनमें साहित्यकारों के लिए आवासीय सुविधा, संगोष्ठी कक्ष एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान के तहत साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों को पांच लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की जा रही है। समारोह में भाषा मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक खजान दास, सचिव नीरज खैरवाल, भाषा संस्थान की निदेशक जसविंदर कौर, दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल आदि मौजूद रहे। संचालन प्राचार्य डॉ सुशील उपाध्याय ने किया।

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