उत्तराखंड: विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद हुए द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम के कपाट
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द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बंद कर दिए गए हैं। बाबा की चल उत्सव विग्रह डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए पहले पड़ाव गौंडार गांव पहुंच गई है।
जहां पर ग्रामीणों ने सामूहिक अर्घ्य लगाकर आराध्य की पूजा-अर्चना की। आज शुक्रवार को डोली रांसी गांव पहुंचेगी। जबकि 22 नवंबर को डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में छह माह की पूजा-अर्चना के लिए विराजमान होगी।
सुबह पांच बजे मुख्य पुजारी टी. गंगाधर लिंग द्वारा बाबा मद्महेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। आराध्य का श्रृुंगार कर भोग लगाकर आरती उतारी गई। और इसके उपरांत स्वयंभू लिंग को समाधि रूप देकर भष्म से ढककर विशेष पूजा की गई।
इसके बाद सुबह बाबा की भोगमूर्तियों को चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान करते हुए गर्भगृह के द्वार बंद किए गए। इस मौके पर अन्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए डोली ने मंदिर की तीन परिक्रमा करते हुए परिसर में रखे अपने ताम्रपात्रों का निरीक्षण किया।
आराध्य के जयकारों से गूंज उठा धाम
ठीक 8.30 बजे सुबह मंदिर के कपाट बंद करने के साथ ही बाबा की चल उत्सव विग्रह डोली ने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया। इस मौके पर पूरा क्षेत्र आराध्य के जयकारों से गूंज उठा। डोली नानू, खटरा, बणतोली होते हुए दोपहर 12 बजे अपने गौंडार गांव पहुंची।
जहां पर ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डोली का स्वागत किया। मुख्य पुजारी ने डोली की आरती करते हुए भगवान मद्महेश्वर को अर्घ्य लगाया। इस मौके पर डोली प्रभारी मनीष तिवारी, मृत्युंजय हिरेमठ, भगवती शैव, राजीव भट्ट, सुनील सिद्ध, संदीप बर्त्वाल, विनोद देवशाली, राजेश तिवारी, दिलवर सिंह संजय सिंह, बृजमोहन सिंह पंवार, शिव चरण सिंह समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे।