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उत्तराखंड: सल्ट फतह, अब सीएम तीरथ के उपचुनाव पर नजर, सामने हैं कई और चुनौतियां
Tue, 04 May 2021 12:10 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 04 May 2021 12:10 PM IST
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तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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उत्तराखंड में सल्ट विधानसभा उपचुनाव में जीत मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ही इस उपचुनाव को मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा के साथ जोड़कर देखा जा रहा था।
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2022 के विधानसभा चुनाव के इस सेमीफाइनल में भाजपा की कामयाबी से निसंदेह मुख्यमंत्री खेमा उत्साहित है। लेकिन सच्चाई यही है कि इस उपचुनाव के साथ अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के चुनाव पर लग गई हैं। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री को छह महीने में चुनावी परीक्षा देनी है।
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इसलिए सल्ट फतह के बाद अब सियासी हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि मुख्यमंत्री किस सीट से चुनाव लड़ेंगे? वर्तमान में गंगोत्री विधानसभा सीट खाली है, लेकिन क्या मुख्यमंत्री गंगोत्री सीट से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद कई विधायकों ने अपनी सीट ऑफर की है। लेकिन इस राजनीतिक परीक्षा से पहले मुख्यमंत्री के सामने कई और चुनौतियां हैं।
बढ़ते कोरोना संक्रमण पर काबू पाना
प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सोमवार तक प्रदेश में कोविड के सक्रिय मामले 55436 तक पहुंच चुके हैं। सरकार के सामने कोरोना संक्रमण को हर हाल में रोकने की चुनौती है।
लॉकडाउन का दबाव
कोरोना संक्रमण की चैन को तोड़ने के लिए उत्तराखंड सरकार पर लॉकडाउन का दबाव है। सरकार ने फिलहाल कोरोना संक्रमण के अधिक प्रभाव वाले इलाकों में तीन दिन का लॉकडाउन किया है। लेकिन केंद्रीय एजेंसी की सिफारिश के बाद अब राज्यों पर भी इसका दबाव है।
गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं जुटाना
कोरोना संक्रमण ने उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भी घुसपैठ शुरू कर दी है। अब गांवों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। राज्यों में लॉकडाउन की स्थिति बनेगी तो वहां से प्रवासी उत्तराखंड का रुख कर सकते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं जुटाने की बड़ी चुनौती है।
टीकाकरण का लक्ष्य भी पूरा करना
कोरोना संक्रमण के दबाव को कम करने के साथ सरकार को वैक्सीनेशन के अभियान को भी जारी रखना है। राज्य में 45 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों का टीकाकरण चल रहा है। सरकार को 18 से 45 वर्ष की आयु के लोगों का भी टीकाकरण करना है। यह पूरा अभियान समय पर वैक्सीन की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
राजकाज चलाने की चुनौती
इन तमाम चुनौतियों से पार पाने के लिए राजकाज चलाने की भी चुनौती सरकार के सामने है। संक्रमण बढ़ने से सरकारी अधिकारी कर्मचारी दफ्तर जाने से डर रहे हैं। वे दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या की सीमित करने या कार्यस्थल पर कोविड-19 की रोकथाम के ठोस इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं।