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उत्तराखंड रोडवेज दोनों हाथों से लुटा रहा राजस्व

Sun, 30 Jul 2017 11:23 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 30 Jul 2017 11:23 AM IST
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uttarakhand roadways waste revenue
uttarakhand roadways

रोडवेज दोनों से हाथ सरकारी राजस्व लुटा रहा है। परिवहन निगम की बसें चलने में नहीं बल्कि उनमें डीजल भरने में ही करोड़ों रुपये केवल देहरादून में ही खर्च हो रहे हैं। यह बात खुद रोडवेज के अधिकारी भी जानते हैं, लेकिन इस सरकारी राजस्व की बचत हो जाए, इसकी फिक्र किसी को नहीं है। जबकि मुख्यालय से लेकर शासन तक देहरादून में स्थित है।

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परिवहन निगम की वर्कशाप हरिद्वार रोड पर है, जबकि बसों का संचालन आईएसबीटी से किया जाता है। इन दोनों के बीच करीब 10 किमी की दूरी है। हर दिन आईएसबीटी से 100 से अधिक बसें डीजल भरने और मेंटेनेंस के लिए वर्कशाप पहुंचती है। इस आवाजाही में हर दिन करीब 80 हजार का डीजल फूंक जाता है।
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अगर इसे एक महीने से गुणा किया जाए तो 24 लाख एक महीने में और पौने तीन करोड़ से ज्यादा की राशि एक साल में डीजल भरने में खर्च हो जाती है। यह तो सरकारी आंकड़ा और अंदाजा है, लेकिन रोडवेज के नेताओं के अनुसार नुकसान इससे कहीं ज्यादा का है। रोडवेज इंपलाइज यूनियन के महासचिव रवि पचौरी कहते हैं कि परिवहन निगम बसों की संख्या और डीजल भरने पर खर्च का अनुमान गलत है। करीब चार सौ बसें डीजल भरने हरिद्वार रोड पर आती है। इस बर्बादी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
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इस राजस्व की बर्बादी का अंदाजा परिवहन निगम के अधिकारियों को भी है। राजस्व के नुकसान का आंकलन किया जा चुका है। इसी के मद्देनजर आईएसबीटी के पास टीपीनगर में वर्कशाप और बसों में डीजल भरने की व्यवस्था विकसित करने के लिए जगह चयनित की गई। रोडवेज ने बाकायदा उस जमीन की बाउंड्री भी कर ली, उसके बाद से मामला रुका हुआ है। बताया जा रहा है कि संबंधित जगह पर एमडीडीए को एक रोड बनानी है, जिसके चलते काम रुका हुआ है।  

शहर में जाम की समस्या
सौ बसों के शहर में आने-जाने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इसके अलावा यातायात भी प्रभावित होता है। कई बार जाम लगने की स्थिति आ जाती हैं। अगर बसें शहर से बाहर रहें, तो कुछ हद तक सड़कों पर दबाव भी कम होगा।


राजस्व के नुकसान का अंदाजा है। इसे रोकने के लिए वर्कशाप विकसित करने और डीजल भरने जैसे कामों के लिए आईएसबीटी के पास जगह चयनित कर ली गई है। जो भी तकनीकी अड़चन है, उसे जल्द दूर कर सारी व्यवस्था टीपीनगर क्षेत्र से की जाएगी।
- बीके संत, प्रबंध निदेशक परिवहन निगम

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