तो क्या परिवहन निगम को कंगाल बना रही है उत्तराखंड सरकार?
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उत्तराखंड परिवहन निगम को कंगाल बनाने पर अपनी ही सरकार आमादा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो सरकार ने दिव्यांगों, छात्र छात्राओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों समेत तमाम वर्ग के लोगों के लिए निगम की बसों में यात्रा करने को लेकर कई कल्याणकारी योजनाएं तो संचालित कर दी लेकिन उनके एवज में निगम को फूटी कौड़ी नही दी। दूसरी ओर प्रबंध निदेशक ने प्रमुख सचिव परिवहन को पत्र लिखकर विभिन्न मदों में बकाया 84.94 करोड़ बकाए का भुगतान करने का अनुरोध किया है।
परिवहन निगम के अफसरों के मुताबिक सरकार ने दिव्यांगों और सहवर्ती यात्रियों, मान्यता प्राप्त पत्रकारों, छात्र छात्राओं, रक्षाबंधन पर महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए निगम की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा देने के साथ ही ‘मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ योजना’ शुरू कर दी।
सरकार ने आश्वासन दिया कि मुफ्त यात्रा कराने के एवज में परिवहन निगम केा भुगतान किया जाएगा लेकिन अब सरकार अपने वादे से मुकर रही है। आकड़ों पर नजर डाले तो इन योजनाओं में सरकार को निगम को 20.25 करोड़ रुपये का भुगतान करना है लेकिन फूटी कौड़ी नही मिल पा रही है।
निगम की स्थिति बदहाल
इसके साथ ही साल 2013 में आयी प्राकृतिक आपदाओें के दौरान आपदा पीड़ितों को नि:शुल्क यात्रा सुविधाएं मुहैया कराने और आपदा में निगम की परिसंपत्तियों को हुए नुकसान के एवज में भी 21.91 करोड़ का भुगतान किया जाना है। निगम की स्थिति कितनी बदहाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निगम सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और नकदीकरण तक नही कर पा रहा है इन मदों में निगम पर कर्मचारियों का 52.78 करोड़ रुपये बकाया है।
निगम की स्थिति कितनी बदहाल है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि निगम ने सरकार ने खराब बसों के स्पेयर पार्ट्स खरीदने के लिए 6.30 करोड़ और डीजल खरीदने के लिए 6.50 करोड़ की मांग रखी है लेकिन इन मदों में भी एक रूपया नही मिल पा रहा है।
अब इस संबंध में प्रबंधक निदेशक बीके संत ने प्रमुख सचिव परिवहन को पत्र लिखकर बकाया भुगतान कराने का अनुरोध किया है। प्रबंध निदेशक का कहना है कि यदि सरकार ने सुध नही ली तो जुलाई माह में बसों का संचालन ठप होने के साथ ही कर्मचारियों के वेतन भुगतान का संकट खड़ा हो जाएगा।