फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand roadways in loss.

परिवहन निगम घाटे में, पर अफसर ठाठ में

Mon, 08 Feb 2016 12:31 PM IST
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून
आशीष डोभाल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 08 Feb 2016 12:31 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand roadways in loss.

परिवहन निगम को प्रतिदिन लगभग 22 लाख रुपये का घाटा हो रहा है बावजूद अधिकारियों के ठाठ कम नहीं हो रहे हैं।

विज्ञापन


निगम के करीब 50 अफसरों को लग्जरी गाड़ियां, डिपो के लिए आवभगत मद, अधिक किराये पर आलीशान निगम मुख्यालय, निगम अध्यक्षों के ऑफिस-घर की साज-सज्जा पर भारी भरकम खर्च किया गया है। घाटे से उबारने के बजाय निगम की संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने की तैयारी है। अधिकारी निगम की गाढ़ी कमाई को पलीता लगा रहे हैं।

उत्तराखंड परिवहन निगम को चलाने के लिए प्रतिदिन करीब एक करोड़ 42 लाख का खर्चा आता है। वहीं आय कभी एक करोड़ 10 लाख तो कभी एक करोड़ 20 लाख से ऊपर नहीं आ रही है। ऐसे में परिवहन निगम कभी करीब 22 तो कभी करीब 32 लाख के घाटे में चल रहा है।
विज्ञापन


परिवहन निगम के करीब 50 अधिकारी प्रतिदिन लग्जरी गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। अधिकारियों को अगर दिल्ली, टनकपुर, देहरादून या किसी क्षेत्र में जाना हो तो बस सेवा होने के बाद भी निगम की बस में नहीं बैठते। अफसर अपनी लग्जरी गाड़ियों में निगम का तेल भरकर चलते हैं। इससे प्रतिदिन कई लाख रुपये का चूना लग रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


परिवहन निगम के खाते से मुख्यालय भवन किराया मद में करीब एक लाख 20 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है। जबकि विभाग के एमडी और उपायुक्त परिवहन एक ही हैं और सहस्त्रधारा रोड स्थित उपायुक्त कार्यालय से निगम का मुख्यालय आसानी से संचालित किया जा सकता है।

परिवहन निगम के प्रदेशभर में संचालित डिपो के लिए हर माह आवभगत में करीब पांच लाख रुपये जारी किया जाता है। इसके तहत सभी डिपो मेहमानों की आवभगत करने के अलावा स्टेशनरी आदि खरीदते हैं। अगर धरातल पर देखा जाए तो वास्तविक तस्वीर कुछ और ही नजर आती है।

खराब ई-टिकटिंग मशीन की रिपेयरिंग के लिए हर माह एक लाख रुपये जारी किए जाते हैं जबकि नई मशीनें खरीदने में लेटलतीफी की जा रही है। नई मशीनें अगर खरीद ली गई तो मेंटेनेंस-रिपेयरिंग का यह बजट आना बंद हो जाएगा।

हमारी मांग है कि निगम को सही तरीके से चलाया जाए। ठीक से नहीं चलाना है तो इसे बंद कर कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित किया जाए। यह अच्छी बात नहीं है कि हम रोज-रोज मांग पत्र दें और धरना-प्रदर्शन करें और अनावश्यक रूप से अपना समय बर्बाद करें। सरकार को अपनी मंशा इस बारे में साफ करनी चाहिए कि निगम चलाना है या नहीं?
- रामचंद्र रतूड़ी, महामंत्री रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तराखंड

अगर विभागीय अधिकारी सुपर विजन नहीं करेंगे तो आय और घटेगी। कई मद ऐसे हैं जिनका पैसा हर विभाग में जारी किया जाता है। कार्यालय भवन सहस्त्रधारा में नहीं बनाया जा सकता क्योंकि वह निगम का अंग नहीं है।
- दीपक जैन, जीएम संचालन/तकनीकी, परिवहन निगम

कार्यशाला से आईएसबीटी तक प्रतिदिन 50 हजार की चपत
राजधानी दून में अपना बस अड्डा निजी हाथों में देने के बाद आईएसबीटी से किराये के स्टेशन से एक ओर जहां रैम्की कंपनी को हर दिन हजारों रुपये दिए जा रहे हैं। वहीं हरिद्वार रोड स्थित निगम कार्यशाला तक पहुंचने में करीब 20 किमी का अतिरिक्त तेल और संविदा चालक का पैसा भी निगम को प्रतिदिन करीब 50 हजार से भी ऊपर का घाटा दे रहा है।


टनकपुर, हरिद्वार, काशीपुर, काठगोदाम, रुद्रपुर, हल्द्वानी, ऋषिकेश आदि जगहों पर कार्यशाला बस स्टैंड के पास है। बता दें संविदा चालक को प्रति किमी 1.45 रुपये दिया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed