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Ranikhet: बकरियों को बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ गया चरवाहा, बीच में आए कुत्तों ने ऐसे बचाई जान
Sun, 11 Dec 2022 11:22 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, रानीखेत (अल्मोड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, रानीखेत (अल्मोड़ा)
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 11 Dec 2022 11:22 PM IST
सार
पंडेरगाव, चमोली निवासी यशपाल सिंह नेगी ने भेड़-बकरियों के झुंड के साथ परंपरागत पड़ाव द्वारसौं के कालीगाड़ जंगल में डेरा डाला। साथ में मित्र डबल सिंह भी थे। खाना खाने के बाद सब सो गए थे। देर रात तेंदुए ने भेड़ों के झुंड पर हमला कर दिया और तेंदुआ एक भेड़ को उठाकर ले जाने लगा।
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तेंदुआ
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
तहसील के द्वारसौं गांव पहुंचे उच्च हिमालय के निचले क्षेत्रों में निवास करने वाले चरवाहे का अचानक तेंदुए से सामना हो गया। भेड़ को बचाने के लिए चरवाहा भी तेंदुए से भिड़ गया। तेंदुए ने उन पर हमला कर दांत गड़ा दिए। कुत्तों के शोर मचाने के बाद तेंदुआ भाग गया। राजकीय अस्पताल रानीखेत में चरवाहे का इलाज चल रहा है।
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जाड़े के दिनों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोग निचले क्षेत्रों में प्रवास पर आते हैं। शनिवार को पंडेरगाव, चमोली निवासी यशपाल सिंह नेगी ने भेड़-बकरियों के झुंड के साथ परंपरागत पड़ाव द्वारसौं के कालीगाड़ जंगल में डेरा डाला। साथ में मित्र डबल सिंह भी थे। खाना खाने के बाद सब सो गए थे। देर रात तेंदुए ने भेड़ों के झुंड पर हमला कर दिया और तेंदुआ एक भेड़ को उठाकर ले जाने लगा।
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यशपाल सिंह ने भेड़ को बचाने का प्रयास किया लेकिन तेंदुए ने उन पर हमला कर हाथ में दांत गड़ा दिए। शोर मचने पर दल के साथ पहुंचे कुत्तों ने तेंदुए को वहां से खदेड़ दिया। द्वारसौं वन चौकी के वनकर्मी राजेंद्र प्रसाद को सूचना मिलने के बाद वह भी मौके पर पहुंच गए। घायल यशपाल सिंह को निजी वाहन से राजकीय अस्पताल रानीखेत पहुंचाया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाने की मांग उठाई है।
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रात में सूचना मिलने के बाद मैं स्वयं टीम को लेकर वहां पहुंचा। घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है हालांकि उनकी हालत खतरे से बाहर है। जल्द उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद है। - तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी रानीखेत