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उत्तराखंड: परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में अगले साल भी अच्छी स्थिति की उम्मीद नहीं, इस बार मिला था 35वां स्थान
Thu, 10 Nov 2022 12:11 PM IST
रेनू सकलानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Thu, 10 Nov 2022 12:11 PM IST
सार
2020-21 में उत्तराखंड 37 राज्यों में 35वें स्थान पर रहा। रैंकिंग में सुधार के लिए अब विद्या शिक्षा केंद्र पोर्टल का इंतजार करना पड़ेगा। इस पोर्टल के माध्यम से छात्र और शिक्षकों का डाटा आधार से लिंक करते हुए ऑनलाइन होना है।
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धन सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में उत्तराखंड की स्थिति अगले सत्र में भी सुधरने की उम्मीद नहीं है। कारण यह है कि इसके लिए विद्या शिक्षा केंद्र पोर्टल का शुरू होना जरूरी है। यह छह माह बाद ही शुरू हो पाएगा। पोर्टल शुरू नहीं होने से रैंकिंग में सुधार के लिए डाटा अपडेट नहीं हो पाया।
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2020-21 में उत्तराखंड 37 राज्यों में 35वें स्थान पर रहा। इस पोर्टल के माध्यम से छात्र और शिक्षकों का डाटा आधार से लिंक करते हुए ऑनलाइन होना है। इस डाटाबेस के आधार पर छात्र और शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी। बच्चों की शैक्षिक और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को भी ऑनलाइन डाटाबेस से जोड़ा जाना है।
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इसी आधार पर शिक्षकों की योग्यता और कार्यक्षमता का आकलन किया जाना है। इन गतिविधियों के करीब 10-10 नंबर जोड़कर करीब 360 नंबर होते हैं, लेकिन उत्तराखंड को इसमें से करीब 60 से 70 नंबर नहीं मिल पा रहे हैं। प्रदेश में शिक्षकों के स्थानांतरण के आवेदन भले ही ऑनलाइन भरे जाते हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन अपनाई जा रही है।
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इसके 20 नंबर भी उत्तराखंड को नहीं मिलते हैं। इसके अलावा कई स्कूलों में प्रभारी प्राधानाचार्य नियुक्त हैं। गाइडलाइन के अनुसार प्रभारी प्रधानाचार्यों वाले स्कूलों को बिना प्रधानाचार्य वाली कैटेगरी में मानते हुए नंबर दिए जाते हैं।
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जब तक विद्या शिक्षा केंद्र पोर्टल शुरू नहीं हो जाता, तब तक यही स्थिति बनी रहेगी। कोशिश की जा रही है अगले छह माह में यह तैयार हो जाएगा। डाटा अपलोड होने में भी समय लगेगा। इसलिए वर्ष 2022-23 तक ही स्थिति सुधर पाएगी। शनिवार को इस संबंध में मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई है। - रविनाथ रमन, सचिव शिक्षा।