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उत्तराखंड: शीतकालीन विस सत्र गैरसैंण में न कराने को लेकर सियासत गरमाई, ठंड बनी वजह

Fri, 22 Nov 2019 09:03 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 22 Nov 2019 09:03 AM IST
सार

  • सीएम ने कहा कि सत्र कहां होगा यह सरकार को तय करना है
  • दिसंबर में गैरसैंण में होती है ठंड, विस में कुछ विधायक बुजुर्ग

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Uttarakhand Politics Warm for for assembly winter session 2019 not doing in gairsain
गैरसैंण विधानसभा भवन

विस्तार

गैरसैंण में विधानसभा का शीतकालीन सत्र को लेकर विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बयानों से सियासत गरमा उठी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि विधानसभा का सत्र कहां करना है, यह तय करने का अधिकार सरकार का है।

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उनकी यह प्रतिक्रिया विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के उस बयान के संबंध में पूछे गए सवाल पर आई जिसमें अग्रवाल ने कहा कि विधानसभा सचिवालय गैरसैंण में सत्र कराने को तैयार है।
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 दिसंबर के महीने में पूर्व में सत्र कराया जा चुका है, लेकिन सीएम ने सत्र न कराए जाने की एक बड़ी वजह सर्दी को बताया है। उनका कहना है कि विधानसभा में कई बुजुर्ग विधायक हैं, जिनकी बात सरकार को सुननी होती है।
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मगर सीएम की इस चिंता से जुदा विधानसभा में सबसे बुजुर्ग विधायकों में शामिल पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल का कहना है कि गैरसैंण में सर्दी के कारण सत्र न कराए जाने को लेकर कोई विधायक नहीं कहेगा। उनका कहना है कि सरकार यदि सत्र कराती है तो वे गैरसैंण जाने को तैयार हैं।

दरअसल, गैरसैंण में बजट सत्र कराने के बाद से त्रिवेंद्र सरकार ने अब तक वहां कोई सत्र नहीं कराया है। विपक्ष का तर्क है कि विधानसभा में संकल्प पारित हो चुका है कि गैरसैंण में बजट सत्र आहूत होगा। सियासी हलकों में यह चर्चा थी कि प्रदेश सरकार शायद शीतकालीन सत्र गैरसैंण में करेगी, लेकिन आधिकारिक सूत्रों की मानें तो शीतकालीन सत्र चार से 10 दिसंबर तक देहरादून में होना सुनिश्चित हो चुका है।

अब इस संबंध में विधायी और विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने की औपचारिकता बाकी है। इस बीच गैरसैंण में सत्र को लेकर मीडिया कर्मियों ने स्पीकर से पूछा तो उनका कहना था कि यह निर्णय प्रदेश सरकार को करना है, सरकार कहेगी तो सत्र आहूत हो जाएगा। गैरसैंण विधानसभा में दिसंबर माह में पहले भी सत्र कराया जा चुका है। स्पीकर के इस बयान पर मीडिया कर्मियों ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा तो उन्होंने साफ किया कि सत्र कहां आहूत करना है, यह सरकार को तय करना है। 
   
यह सरकार को निर्णय लेना है कि सत्र कहां पर होगा। कई ऐसे वरिष्ठ विधायक हैं, जिनकी आयु काफी है। सबकी बात सुननी पड़ती है। कई दिक्कतें गैरसैंण में रहती है, विशेषकर सर्दियों के समय में। पिछली बार का अनुभव अच्छा नहीं रहा। सत्र कब करना है यह सरकार को तय करना है।

- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
 
ऐसा कोई भी विधायक नहीं कह सकता है। सरकार गैरसैंण को लेकर गंभीर नहीं। पहली बार होगा कि स्थापना दिवस पर कोई कार्यक्रम गैरसैंण में नहीं किया गया। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में फैसला लिया गया था, कि हर वर्ष बजट सत्र गैरसैंण में होगा। सरकार ने शीतकालीन सत्र भी गैरसैंण में नहीं किया। पिछले वर्ष की तरह बजट सत्र करेगी, इसका कोई इरादा नहीं है। ऐसा हुआ तो गैरसैंण में विधानसभा का शून्य सत्र हो जाएगा, जो उचित नहीं है। जहां तक रहने की व्यवस्था का सवाल है, करोड़ों रुपये खर्च किए गए। गैरसैंण में सत्र न होने से लोग निराश भी हैं।
- गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष

विधानसभा सत्र कब और कहां होना है, यह प्रदेश सरकार को तय करना है। जहां तक विधानसभा की तैयारी का सवाल है तो वह पूरी है। गैरसैंण में दिसंबर में सत्र कराया जा चुका है।         
- प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष (सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया) 

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