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Uttarakhand: विवादों के बीच रुड़की के मेयर गौरव गोयल ने दिया इस्तीफा, पढ़ें क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी

Fri, 28 Jul 2023 10:04 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून/रुड़की
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून/रुड़की Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 28 Jul 2023 10:04 PM IST
सार

मेयर गौरव गोयल ने शुक्रवार को शासन को अपना इस्तीफा भेजा था। प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। 

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Uttarakhand Politics News Roorkee Mayor Gaurav Goyal resigns due to many controversies
रुड़की मेयर गौरव गोयल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लंबे समय से चल रहे विवादों के बीच शुक्रवार को नगर निगम रुड़की के मेयर गौरव गोयल ने इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा शासन ने स्वीकार करते हुए हरिद्वार के डीएम को प्रशासक तैनात कर दिया है। निगम के रूटीन कार्य नगर आयुक्त के स्तर से देखे जाएंगे।

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मेयर गौरव गोयल ने शुक्रवार को शासन को अपना इस्तीफा भेजा था। प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उन्होंने नगर निगम रुड़की के मेयर पद को रिक्त घोषित कर दिया है।
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इसके साथ ही हरिद्वार के जिलाधिकारी को निगम में प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, जिलाधिकारी के आदेशों के तहत निगम में नगर आयुक्त सभी रूटीन काम करेंगे।
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सिलसिलेवार विवादों ने लिख दी ऐतिहासिक अंजाम की पठकथा

निरंतर चले विवादों, आरोप-प्रत्यारोपों ने आखिरकार मेयर गौरव गोयल को ऐतिहासिक अंजाम तक लाकर खड़ा कर दिया। जनता के चहेते चेहरे के रूप में भारी मतों से जीतकर आए मेयर गौरव गोयल अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए।

शहर के लिए 25 नवंबर 2019 उम्मीदों से भरा था। निर्दलीय प्रत्याशी गौरव गोयल, भाजपा व कांग्रेस जैसी मजबूत पार्टियों के प्रत्याशियों को पछाड़ते हुए मेयर बने थे। युवा व समाजसेवी के रुप में अपनी पहचान रखने वाले मेयर गौरव गोयल को लेकर सभी को लग रहा था कि शहर के लिए कुछ बड़ा होने वाला है। लेकिन जनता की यह उम्मीदें हवा हो गई।

निगम की पहली बोर्ड बैठक में पार्षद व मेयर अलग-अलग नजर आए। इसके बाद जो भी बैठक हुई। सभी में हंगामा सामान्य बात रही। पार्षदों और मेयर के बीच खींचतान से बोर्ड चल नहीं पाया। पार्षदों के साथ-साथ अधिकारियों से भी मेयर की ठन गई। बात यही नहीं थमी, ठेकेदार और कर्मचारी तक भी मेयर से नाराज हो गए। यहां तक की उन्होंने इसकी शिकायत शासन तक की। यही कारण रहा कि मेयर शहर पर ध्यान देने के बजाए आरोप प्रत्यारोपों में ही उलझे रहे। चर्चा यह भी है कि मेयर पर छह साल के निष्कासन की कार्रवाई होनी थी।

 

पूर्व विधायक से माइक छीनना पड़ा भारी

बोर्ड बैठक के दौरान निर्वतमान झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल से माइक छीनना मेयर गौरव गोयल पर काफी भारी पड़ा। इसके बाद शिकायतों का दौर शुरू हुआ। जांच रिपोर्ट ने भी मेयर को कटघरे में ला दिया। इससे संगठन के लोग भी मेयर के खिलाफ हो गए थे। जिसका खामियाजा मेयर को कई रुप में भुगतना पड़ा।

 

25 लाख रिश्वत मांगे जाने के ऑडियो ने धूमिल की छवि

लीज की संपत्ति स्थानांतरण को लेकर सुबोध गुप्ता से 25 लाख रुपये मांगे जाने का एक ऑडियो वायरल हुआ। जिसमें दावा किया गया था कि रुपये मेयर गौरव गोयल ने मांगे हैं। इस मामले में कोतवाली रुड़की में मुकदमा तक दर्ज हुआ। ऑडियो और मेयर की आवाज का मिलान भी कराया गया। मेयर गोयल के खिलाफ यह सबसे ठोस सबूत साबित हुआ।

महज संयोग था या फिर सच की आहट

इसे महज संयोग कहें या फिर सच की आहट। 25 जुलाई को हुई बोर्ड की बैठक में मेयर गौरव गोयल अपनी कुर्सी पर नहीं बैठ पाए। पार्षदों ने देरी से आने पर उनके स्थान पर अध्यक्ष के रुप में पार्षद चंद्र प्रकाश बाटा को मनोनीत कर उन्हें मेयर की कुर्सी पर बैठा दिया था।

हाईकोर्ट में डाली रिट ने बढ़ा दी थी मुश्किलें

नगर निगम रुड़की के मेयर गौरव गोयल खिलाफ गीतांजलि विहार निवासी अमित अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में रिट दायर की थी। जिसमें उन्होंने मेयर पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कराने व कार्रवाई की मांग की थी। जिसमें उन पर लीज संपत्ति हस्तांतरण के नाम पर 25 लाख रुपये रिश्वत मांगे जाने, निगम की पत्रावलियों में छेड़छाड़ करने, ठेकेदारों को परेशान करने व कर्मचारियों से ठीक व्यवहार न करने आदि के आरोप लगाए थे। न्यायायल ने इस पर संज्ञान लिया। जिसके चलते निर्वतमान जिलाधिकारी हरिद्वार विनय शंकर पांडेय ने मुख्य विकास अधिकारी प्रतीक जैन की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था।

 

विधायक, पार्षद और पूर्व अधिकारी को बताया जिम्मेदार

मेयर गौरव गोयल ने इस्तीफा देने के लिए शहर विधायक प्रदीप बत्रा, पार्षदों और निगम के एक पूर्व अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया है। बताया कि त्रस्त होकर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है। पूर्व नियोजित ढंग से हर बोर्ड बैठक में उन्हें टारगेट करते हुए पार्षदों ने हंगामा किया। यह सब विधायक प्रदीप बत्रा की शह पर हुआ। बता दें कि नगर निगम बोर्ड की 25 जुलाई को जमकर हंगामा हुआ था। बिना कोई प्रस्ताव पढ़े ही बोर्ड बैठक स्थगित कर दी थी। मेयर ने उसी दिन घोषणा कर दी थी कि वह पद से इस्तीफा देंगे।

इस्तीफा नहीं भी देते, तो भी मेयर का हटना है तय

विधायक प्रदीप बत्रा ने मेयर गौरव गोयल के सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि मेयर गौरव गोयल के खिलाफ कई जांच चल रही है। जिनमें उन पर आरोप भी लगभग सिद्ध हो चुके हैं। न्यायालय इस मामले में संज्ञान ले रहा है। एक अगस्त मेयर गौरव गोयल पर लगे आरोपों की सुनवाई है। जिसमें उन पर कार्रवाई हो सकती है। जिससे वह बौखलाए हुए हैं। जनता की हमदर्दी बटोरने के लिए यह उनका राजनीतिक स्टंट हैं। शहर का जो विकास अवरुद्ध था उनके हटने के बाद उसमें तेजी आएगी।

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