उत्तराखंड: चेहरा बदला पर विधानसभा चुनाव में तो त्रिवेंद्र के काम लेकर ही जाएगी भाजपा
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री की कुर्सी से त्रिवेंद्र रावत को बेशक विदा कर दिया, लेकिन विधानसभा चुनाव में वह त्रिवेंद्र राज के कार्यों को लेकर ही जाएगी। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए भाजपा के पास मुश्किल से आठ से नौ महीने होंगे, इसमें विकास की नई इबारत लिखना आसान नहीं होगा।
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कुर्सी से हटाकर पार्टी त्रिवेंद्र राज के चार साल के कार्यों को नजरअंदाज नहीं कर पाएगी। चार साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाना उसकी राजनीतिक मजबूरी होगी। 18 मार्च को सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं। इस दिन सरकार ने सभी 70 विधानसभा सीटों पर चार साल की उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने की रणनीति बनाई है।
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बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में इन कार्यक्रमों का क्या होगा, अभी इस पर तस्वीर साफ होनी है। मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधानसभा में 18 मार्च को राज्यस्तरीय कार्यक्रम होना है। यहां केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना है। अब इस कार्यक्रम को लेकर सस्पेंस बना है।
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चूंकि यह सरकारी कार्यक्रम है, इसलिए काफी कुछ नए मुख्यमंत्री पर निर्भर करेगा। लेकिन जानकार मान रहे हैं कि चार साल की उपलब्धियों को लेकर भाजपा जब जनता के बीच जाएगी तो उसे चेहरा बदलने की जरूरत से जुड़े सवाल का सामना जरूर करना पड़ सकता है।
फूट-फूटकर रोने लगे कई कार्यकर्ता
देहरादून कैंट के शांत माहौल में बना मुख्यमंत्री आवास मंगलवार को काफी चहल-पहल से भरा नजर आया। जैसे ही मुख्यमंत्री दिल्ली से लौटकर आवास में पहुंचे तो कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटना शुरू हो गया। त्रिवेंद्र लगातार कार्यकर्ताओं से बातचीत करते रहे।
अपनी चार साल की पारी में उन्होंने जो कमाया, उसका नजारा उनके सामने था। लोगों की आंखों से आंसू टपक रहे थे। कार्यकर्ता अचानक हुए इस फैसले से खुश नहीं थे। उनका कहना था कि आखिर अचानक ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि पांच साल पूरे नहीं करने दिए गए।
दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री आवास में कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा हुआ था। जैसे ही त्रिवेंद्र उनके बीच पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। जैसे सभी कह रहे थे कि आप संघर्ष करो, हम आपके साथ हैं। हालांकि, त्रिवेंद्र को यह पता था कि अब उनका इस पद पर बने रहने का समय खत्म हो चुका है।
लिहाजा, वह जमीन पर बैठकर ही कार्यकर्ताओं से बात करने लगे। वह उन्हें समझाने वाले लहजे में नजर आए। वह लगातार कह रहे थे कि जो हुआ संगठन ने बेहतर किया है। आगे भी जो होगा, बेहतर ही होगा।
कार्यकर्ताओं का आना-जाना लगा रहा
दिनभर मुख्यमंत्री आवास में विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं का आना-जाना लगा रहा। आवास के बाहर दोपहर बाद तक भी विधायक मुन्ना सिंह चौहान यही कहते रहे कि कहीं कोई परेशानी नहीं है। कोई भी विधायक नाराज नहीं है।
अभी तक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ही हैं, लेकिन चार बजे से अफवाहों का सिलसिला थमना शुरू हुआ तो सबने ‘खामोशी की चादर’ ओढ़ ली। मुख्यमंत्री राजभवन से लौटकर सीधे पत्रकारों के बीच पहुंचे और वहां प्रेसवार्ता में उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी दी। इसके बाद वह लौटकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे तो फिर कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया।
वह आवास के बाहर लॉन में ही बैठ गए। उनके साथ उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत, विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन, मेयर सुनील उनियाल गामा, भाजपा नेता अनिल गोयल सहित तमाम पदाधिकारी भी वहीं बैठ गए। इस बीच बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी कई महिला कार्यकर्ताओं के साथ उनके सामने थी। वह इस फैसले पर भावुक हो गई।
बमुश्किल आंसू रोकते हुए त्रिवेंद्र से बोलीं- आखिर ऐसा भी क्या था। पलटकर त्रिवेंद्र ने सवाल किया कि भगवान राम का क्या अपराध था तो कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह समय और था। यह कलयुग है। कुल मिलाकर वह सभी इस फैसले से खफा नजर आईं। बात को बीच में छोड़कर त्रिवेंद्र आवास के अंदर चले गए। इसके बाद भी देर शाम तक कार्यकर्ता वहां से जाने का नाम नहीं ले रहे थे।