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उत्तराखंड: राजनीतिक दलों ने कर्मकार कल्याण बोर्ड में घपले-घोटाले की आशंका जताई, सीएम को लिखा पत्र 

Tue, 24 Nov 2020 10:23 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 24 Nov 2020 10:23 PM IST
सार

  • पांच राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री को लिखा पत्र 
  • हजारों मजदूरों को अब भी नहीं मिल रहा है उनका हक
  • नवंबर में ही आवेदनों को रद्दी में फेंकने का मामला सामने आया

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Uttarakhand: Political parties fear scandal in workers welfare  Board, letter written to CM
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

करीब पांच राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की शिकायत की है। इनका कहना है कि घपलों-घोटालों की जांच तो ठीक है, लेकिन हजारों निर्माण मजदूरों को उनके हक से अब भी वंचित किया जा रहा है। 

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माकपा, भाकपा-माले, सपा सहित अन्य दलों की ओर से सीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कर्मकार बोर्ड में अब भी घोटालों की आशंका है। बोर्ड के अधीन 1996 से निर्माण श्रमिकों के लिए योजनाएं चल रही हैं। मार्च में कम से कम 50 हजार मजदूरों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया गया क्योंकि उनके कार्डों का नवीनीकरण नहीं हो पाया था।
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इन पांच दलों का आरोप यह भी है कि कई मजदूरों के पंजीकरण आवेदनों को जलाया गया या फिर रद्दी में फेंक दिया गया। नवंबर माह में ही बोर्ड के पुनर्गठन के बाद का यह मामला बताया जा रहा है। दलों का यह भी कहना है कि मजदूरों के पंजीकरण के आवेदनों पर जल्द फैसला नहीं किया जाता। कई बार तो तीन-तीन साल तक आवेदन लंबित रहते हैं। 
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पत्र में कहा गया है कि 17 नवंबर को सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के तहत श्रम मंत्रालय ने नियमावली घोषित की। इस नियमावली के अनुसार निर्माण मजदूर कल्याणकारी उपकर की रकम बिल्डर खुद तय करेंगे। अगर वे गलत जानकारी देते हैं तो उनके खिलाफ सीमित कार्यवाही होगी।


इस कमजोर कानून के खिलाफ राज्य सरकार को आवाज उठानी चाहिए। पत्र में कांग्रेस के पूर्व प्रटेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, सपा के प्रदेश अध्यक्ष एसएन सचान, भाकपा के राज्य सचिव समर भंडारी, भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी, सीपीआई एम के वरिष्ठ नेता बचीराम कंसवाल आदि के हस्ताक्षर हैं।

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