भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों के असली माता-पिता की पहचान के लिए पुलिस कराएगी डीएनए टेस्ट
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बच्चों की भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने के लिए देहरादून जिले में पुलिस दो माह का विशेष अभियान चलाएगी। इस दौरान प्रयास किया जाएगा कि बच्चे वापस इस राह पर नहीं लौट पाए। साथ ही बच्चों के असली माता-पिता की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।
पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने सोमवार को संबंधित विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने के लिए मंथन किया। कहा, बच्चों को इससे इन्हें हटाकर मुख्यधारा में लाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। जागरूकता, कार्रवाई व पुनर्वास का काम और बढ़ाने की जरूरत है।
हल्द्वानी में वीरंगाना ट्रस्ट भिक्षावृत्ति में शामिल 123 बच्चों को पढ़ा रही है। जबकि पिथौरागढ़ में घनश्याम कोली चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी ऐसे बच्चों की स्किल डेवलपमेंट बढ़ाकर भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने में मदद कर रही है।
डीजी अशोक कुमार ने कहा कि जनता में जागरूकता का अभाव है। उन्हें बताना होगा कि भिक्षावृत्ति एक अपराध है। वे बच्चों को भीख देकर अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं। चौराहों पर बैनर, पोस्टर लगाने के साथ सिनेमा हॉल में शॉर्ट मूवी के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जांएगे।
भिक्षावृत्ति पर रोकने को यह होंगे काम
-भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने के बाद परिजनों के सुपुर्द किया जाएगा।
-भिक्षावृत्ति के संबंध में यदि किसी गैंग या माता-पिता की संलिप्तता पाई जाती है तो अभियोग पंजीकृत कराया जाएगा।
-बच्चों की सुपुर्दगी लेने वाले लोगाें का डीएनए टेस्ट कराकर पता किया जाएगा कि वे असली माता-पिता है या नहीं।
-चौराहों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को बच्चों को भीख न देने के लिए जागरूक किया जाएगा।
-भीख मांगने वालों की धरपकड़ को मंगलवार, शनिवार और पर्वों पर विशेष अभियान चलाया जाएगा।