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उत्तराखंड में हुए इस आंदोलन ने हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत की नींव

Mon, 08 Aug 2016 11:08 AM IST
गौरव मिश्रा / अमर उजाला, देहरादून
गौरव मिश्रा / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 08 Aug 2016 11:08 AM IST
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uttarakhand people initiative in bharat chodho andolan
uttarakhand people initiative in bharat chodho andolan

विश्वयुद्ध के विरोध के साथ-साथ नौ अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उत्तराखंड का अहम योगदान रहा है।

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राज्य अभिलेखागार में उत्तराखंड के लोगों के त्याग, कुर्बानी, समर्पण और संघर्ष की कहानी कैद है। सियासत ने भले ही इस सुनहरे इतिहास की परवाह नहीं की, लेकिन अभिलेखागार उस दौर के प्रचार-प्रसार के लिए नई रणनीति बना रहा है। शैक्षिक और सरकारी शोध संस्थानों को इससे जोड़ने की तैयारी है।

राज्य अभिलेखागार (स्टेट आरकाइव्स) के निदेशक डा. लालता प्रसाद ने बताया कि विश्व युद्ध के विरोध के साथ-साथ भारत छोड़ो आंदोलन में भी राज्य की अहम भूमिका रही। इस सुनहरे इतिहास के प्रचार प्रसार के लिए हम नई रणनीति बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि नौ अगस्त के आंदोलन के आठ को तैयारियां की गई थी।
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देहरादून में भी डोईवाला, गऊघाट, पलटन बाजार, दर्शनी दरवाजे में जुलूस निकाले गए और प्रदर्शन हुआ। लोगों ने धारा 144 का उल्लंघन किया।

सैकड़ों की तादाद में आंदोलनकारी सड़कों पर निकले

uttarakhand people initiative in bharat chodho andolan
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सरकारी और निजी इमारतों पर तिरंगा फहराया गया। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को प्रचारित करने के लिए अभिलेखागार कार्यालय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन पर शोध करने वाली संस्थाओं से जोड़ेगा। इसकी एक बुकलेट भी तैयार की जा रही है, जिसे शैक्षिक संस्थानों को दिया जाएगा। 

इनका था प्रमुख्या योगदान
नौ अगस्त को सैकड़ों की तादाद में आंदोलनकारी सड़कों पर निकले। डीआईआर की धारा 129 के अंतर्गत सभी को गिरफ्तार कर नजरबंद किया गया। आंदोलन में प्रभु महावीर त्यागी का अहम रोल रहा।

इन पर ब्रिटिश हुकूमत ने दो साल कठोर कारावास और सौ रुपये जुर्माना लगाया। बालकृष्ण सनवाल, मदन सिंह, सच्चिदानंद, माधो सिंह, पुरुषोत्तम दत्त को दो वर्ष से ऊपर की कैद हुई।

शेर सिंह, गोपाल सिंह मर्तोलिया, गोपाल दत्त, यशवंती देवी, हरि सिंह बिष्ट को दो वर्ष की सजा हुई। चतर सिंह, राम सिंह, वर्षा देवी, परमानंद गरुण, गोपाल दत्त पाठक, उमेद सिंह बनकोटी, अंबा दत्त बेलवाल, हरक सिंह नेगी, पूरन बिष्ट, कृपा राम मिश्रा मनहर, जयदत्त बेला, कुशल सिंह खर्कवाल, लक्ष्मण सिंह अधिकारी, चंचल सिंह भी जेल गए।

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