{"_id":"8db85f330f76696c8097c5d7acb76db9","slug":"uttarakhand-patwari-return-on-work-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोमवार से काम पर लौटेंगे पर्वतीय पटवारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोमवार से काम पर लौटेंगे पर्वतीय पटवारी
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 01 Feb 2015 08:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में राजस्व पुलिस के काम पर सोमवार से पर्वतीय पटवारियों का वापस लौट आना तय है। रविवार को पर्वतीय पटवारी महासंघ ने इसका संकेत भी दिया। महासंघ का साफ कहना है कि पटवारी टकराव का रास्ता अपनाना नहीं चाहता।
विज्ञापन
दूसरी ओर नो वर्क नो पे को लेकर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद भी शासन का रुख सख्त नहीं रहा। कहा गया कि पटवारी अगर सोमवार से काम पर लौट आते हैं तो उनका हड़ताल अवधि का वेतन नहीं काटा जाएगा।
विज्ञापन
शानिवार को शासन ने काम नहीं तो वेतन नहीं का आदेश जारी किया था। शासन का कहना था कि हाईकोर्ट का साफ निर्देश है कि ड्यूटी आधी अधूरी नहीं होती। लिहाजा पटवारियों का वेतन रोका जाएगा। आदेश जारी होने के बाद रविवार को पर्वतीय पटवारियों में खलबली रही।
विज्ञापन
शासन का साफ कहना था कि सोमवार तक राजस्व पुलिस का काम शुरू नहीं होता तो वेतन काटा जाएगा। ऐसे में पटवारियों केपास फैसला करने के लिए समय ही नहीं बचा। लिहाजा रविवार को फोन पर सभी पदाधिकारियों के बीच बातचीत हुई। पर्वतीय पटवारी महासंघ के संरक्षक बीपी जगूड़ी के मुताबिक अधिकतर पदाधिकारी काम पर लौट जाने के पक्ष में है।
राजस्व पुलिस केलिए संसाधन उपलब्ध कराने की मांग पर पर्वतीय पटवारियों ने दो अक्टूबर से पुलिस कार्य छोड़ दिया था। इनकी मांगों को लेकर शासन से बातचीत भी हुई थी पर पटवारियों का कहना था कि मांगों पर अमल होने केबाद ही काम पर लौटा जाएगा। उधर शासन ने भी नरम रुख अपनाया है। कहा जा रहा है कि पटवारी अगर सोमवार से काम पर लौट आते हैं तो हड़ताल अवधि का वेतन नहीं काटा जाएगा।
ऐसे दिखाई जाती रही है दरियादिली
राजस्व पुलिस कर्मियों की हड़ताल को समाप्त कराने में एक बार फिर कोर्ट का हस्तक्षेप कामयाब हुआ। नो वर्क नो पे को लेकर शासन का उपेक्षा का रवैया ही रहा। इसीका का परिणाम है कि दो अक्टूबर से काम छोड़ देने के बावजूद पटवारियों को वेतन बदस्तूर दिया जाता रहा। अब शासन हड़ताल अवधि का वेतन काटने को तैयार नही है। समीक्षा अधिकारियों के साथ भी यही हुआ। उस समय भी यही कहा गया था कि एक नियत दिन से अगर काम पर नहीं आए तो वेतन कटेगा। लिहाजा समीक्षा अधिकारी भी एक हफ्ता हड़ताल पर रहने के बाद भी साफ बच निकले।
-अधिकतर का यही मानना है कि कोर्ट के सम्मान में अड़ियल रुख नहीं अपनाना चाहिए। फोन से सभी जिला इकाइयों से संपर्क हो गया है। कोर्ट के सामने भी अपना पक्ष रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि हड़ताल से वापस आओ तो बात होगी। पर वापस कैसे आते सरकार ने कोई बात तो की नहीं। अब हम वापस आ रहे हैं तो उम्मीद है कि सरकार बात करेगी।
-बीपी जगूड़ी, संरक्षक, पर्वतीय पटवारी महासंघ