त्रितरीय पंचायत चुनाव: जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के आरक्षण में बदलाव के आसार
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उत्तराखंड में जिला पंचायत अध्यक्ष पदों पर आरक्षण की स्थिति में बदलाव होने के आसार हैं। आरक्षण में देहरादून को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने से पेच फंस गया है। कांग्रेस का आरोप है कि दून को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया है। इससे अन्य सीटों का आरक्षण भी प्रभावित हुआ। बुधवार को इस मामले को आपत्तियां दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत शासन स्तर से जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के लिए जारी किए गए आरक्षण में देहरादून को अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है। इसके बाद से आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि देहरादून को अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित करने में नियमों को ताक पर रखा गया है। इसी के चलते प्रदेश की अन्य सीटों का आरक्षण भी प्रभावित हुआ है।
पिथौरागढ़ की जिला पंचायत अध्यक्ष सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई, जबकि वहां अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व न के बराबर है। इस मामले को लेकर आपत्ति दाखिल की जा रही है। वह व्यक्तिगत स्तर पर भी यह आपत्ति दाखिल करेंगे।
बुधवार को आपत्ति दाखिल करने का अंतिम दिन है। इसके बाद शासन स्तर पर इन आपत्तियों का निस्तारण करके 29 अक्टूबर को आरक्षण का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक आपत्तियों को देखते हुए आरक्षण में बदलाव हो सकता है। शासन के मुताबिक अनुसूचित जनजाति को प्रतिनिधित्व देने के लिए इस सीट को अनुसूचित जनजाति महिला के रूप में आरक्षित किया गया था।
क्या है आरक्षण का फार्मूला
(अनुसूचित जनजाति की संख्या/ कुल जनसंख्या)* 13
- इस फार्मूले के आधार पर देहरादून जिला पंचायत के लिए अधिमान 0.34 निकल कर आया था, और यह एक से कम होने पर इस सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित नहीं किया जा सकता। आरक्षण के लिए जारी शासनादेश में यह स्वीकार भी किया।
क्या किया गया
शासन ने 20 अक्टूबर 2019 को जारी आदेश के तहत 1995, 2002 और वर्तमान में निकल कर आए अधिमान को जोड़ा। इन तीनों का जोड़ 1.29 निकल कर आया। आदेश के मुताबिक यह अधिमान एक से अधिक है लिहाजा यहां एक सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की जा सकती है।