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उत्तराखंड: पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया किराया माफ करने के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती

Tue, 11 Feb 2020 09:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 11 Feb 2020 09:55 PM IST
सार

  • कोर्ट के महाराष्ट्र के राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस देने के निर्देश

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Uttarakhand: Ordinance to waive arrears of former Chief Ministers challenged in High Court
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

विस्तार

हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास भत्ता और अन्य सुविधाओं पर हुए खर्चे को वसूलने के मामले में दायर जनहित याचिका के बाद अब याचिकाकर्ता ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास भत्ता व अन्य सुविधाओं पर हुए खर्च के संदर्भ में राज्य सरकार की ओर से पारित एक्ट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है।

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मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी पूर्व मुख्यमंत्रयिं को दस दिन के भीतर नोटिस देने को कहा है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तिथि नियत की है। याचिका में पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम भी शामिल है।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी है जिसमें सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया किराए को माफ कर दिया था।

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी किए थे लेकिन कुछ नोटिस संबंधित पक्ष को प्राप्त हुए बिना वापस आ गए थे। नोटिस केवल डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को प्राप्त हुआ, जिनके अधिवक्ता मंगलवार को कोर्ट में मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और बीसी खंडूरी के नोटिस वापस आ गए।

पूर्व मुख्यमंत्री  स्व. नारायण दत्त तिवारी व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम पूर्व में नोटिस से अलग रखा था, लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई में खंडपीठ ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम पुन: नोटिस में शामिल करते हुए तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को नोटिस देने की जिम्मेदारी सरकार को दी है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नोटिस सर्व होने के बाद की तिथि नियत की है।

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