उत्तराखंड: रिहायशी इलाके तक पहुंची जंगल की आग, अब बारिश की आस
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तमाम कोशिशों के बावजूद कुमाऊं में जंगलों की आग थम नहीं रही है। अल्मोड़ा के पांडेखोला से सटे जंगल में लगी आग रिहायशी इलाके तक पहुंच गई। बागेश्वर में वनाग्नि की 140 घटनाओं में 198 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। कुंभ ड्यूटी के चलते कार्मिकों की कमी के बीच इन दिनों बढ़ती वनाग्नि की घटनाएं फायर सर्विस के लिए मुसीबत बनती जा रही है। लोगों को अब बारिश की आस है, तभी आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है।
रविवार दोपहर नगर से सटे पांडेखोला में अचानक जंगल धधक गए। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया और आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। पूरे जंगल को आगोश में लेने के बाद आग तेजी से रिहायशी इलाके की ओर बढ़ने लगीं। फायर टीम ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। करीब चार बजे आग बुझाकर दमकल कर्मी वापस लौटे। कुछ ही देर में उसी इलाके में फिर आग भड़क गई।
बागेश्वर जिले के तीनों विकासखंडों में जंगल धधक रहे हैं। वन विभाग की टीम लाख प्रयासों के बावजूद आग को रोक पाने में असफल साबित हो रही है। विभाग ने 29 क्रू स्टेशनों में 180 से अधिक फायर वॉचर तैनात किए हैं। कर्मचारियों की छुट्टियों पर भी रोक लगी है। इसके बाद भी वनाग्नि से विभाग को अब तक करीब छह लाख की चपत लग चुकी है।
चंपावत जिले के विकासखंड बाराकोट के क्वांरखोली और लड़ीधुरा मंदिर मार्ग के जंगल में भीषण आग लगने से करीब दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में वन संपदा जल गई। फायर ब्रिगेड टीम ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। टनकपुर के दोगाड़ी रेंज के कठौल आरक्षित वन कक्ष संख्या पांच और एक में रविवार को आग लग गई। वन कर्मियों के साथ एनडीआरएफ के जवानों ने आग पर काबू पाया।
वातावरण में फिर छायी धुंध, हिमालय हुआ ओझल
जंगलों में आग लगने से वातावरण में धुंध छा गई है। दृश्यता पांच सौ मीटर रह गई है, जिसके चलते हिमालय भी नजरों से ओझल हो गया है। बारिश न होने से नवंबर से ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई थीं। फायर सीजन शुरू होने के बाद तापमान बढ़ने से आग लगने में और अधिक बढ़ोतरी हो गई है। चीड़ के जंगल सूखे पिरूल के कारण सुलग रहे हैं।
आग के कारण जहां एक ओर वन्य संपदा को नुकसान पहुंच रहा है वहीं पर्यावरण को भी भारी क्षति हुई है। पूरा वातावरण धुंध से भर गया है। पांच दिन पूर्व हल्की बारिश होने से धुंध में कुछ कमी आई थी लेकिन एक बार फिर से दृश्यता कम हो गई है। पहाड़ियां नजरों से ओझल हैं। मुनस्यारी, चौकोड़ी आदि दर्शनीय स्थलों से हिमालय भी नजर नहीं आ रहा है। इसके चलते पर्यटक भी मायूस हैं।
चंपावत जिला मुख्यालय में धुंध और धुएं का आलम यह है कि सौ मीटर की दूरी तक भी लोगों को साफ नहीं दिखाई दे रहा है। धुएं के कारण सांस संबंधी रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।