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Uttarakhand News : कालाढूंगी में तेज रफ्तार वाहन ने बाघ काे मारी टक्कर, मौके पर मौत

Thu, 07 Jan 2021 03:39 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी (नैनीताल)
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी (नैनीताल) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 07 Jan 2021 03:39 PM IST
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uttarakhand news : vehicle crushed tiger in kaladhungi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

कालाढूंगी मार्ग पर भाखड़ा पुल के पास बुधवार की रात करीब नौ बजे कार ने बाघ को टक्कर मार दी। उसका शव बृहस्पतिवार सुबह घटनास्थल से 50 फीट की दूरी पर सड़क किनारे आरक्षित वन क्षेत्र में पड़ा मिला। रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज कार्यालय में पशु डॉक्टरों की टीम ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया। वन विभाग ने टीम ने मौके से क्षतिग्रस्त कार भी कब्जे में ले ली है।

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फतेहपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी ख्यालीराम आर्या ने बताया कि बुधवार की रात नौ बजे कालाढूंगी मार्ग पर भाखड़ा पुल से कुछ दूरी पर कालीगाड पुलिया के पास वाहन की टक्कर की सूचना मिली थी। गश्ती टीम मौके पर गई तो सड़क किनारे क्षतिग्रस्त इनोवा कार खड़ी थी। उसके एयर बैग खुले हुए थे। कार के क्षतिग्रस्त हिस्से में बाघ के बाल फंसे मिले।
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इससे आशंका जताई गई कि कार बाघ से टकराई है। इसके बाद बाघ की तलाश की गई लेकिन पता नहीं चला। सुबह फिर से खोजबीन की गई तो छह बजे घटनास्थल से 50 फीट की दूरी पर सड़क किनारे आरक्षित वन क्षेत्र में बाघ का शव पड़ा मिला। उसकी उम्र करीब 12 साल और वजन करीब सौ किलोग्राम था। उसके सिर और मुंह पर चोट के निशान थे। मुंह से खून निकला हुआ था।
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प्रथमदृष्टया मौत का कारण सिर पर चोट लगना सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद शव को जला दिया गया है। बिसरा जांच के लिए आईवीआरआई बरेली और डब्ल्यूआईआई देहरादून भेजा जा रहा है।

वन क्षेत्राधिकारी ख्यालीराम आर्या ने बताया कि वाहन संख्या के आधार पर वाहन स्वामी का पता करने और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने संबंधी कार्रवाई की जा रही है। सूचना मिलने पर डीएफओ हिमांशु समेत अन्य वनाधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

कई वन्यजीवों का मूवमेंट

जहां पर बाघ को टक्कर लगने की बात कही जा रही है, उस इलाके में बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रिपोर्ट हुई है। फतेहपुर रेंज के आरओ ख्याली राम आर्या ने बताया कि जो बाघ मरा है, उसे भी आसपास के जंगल में कई बार देखा गया था। इस इलाके में हाथी समेत अन्य वन्यजीवों की भी आवाजाही है। वनाधिकारियों के अनुसार, फतेहपुर-गदगदिया कॉरिडोर है, जिस पर वन्यजीवों का आवागमन लगातार रहा हैं।

पिछले साल छह बाघों ने तोड़ा दम

राज्य में पिछले साल कई बाघों ने दम तोड़ा था। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी (डब्लूपीएसआई) के प्रोग्राम मैनेजर जोजफ टीटो के अनुसार पिछले साल उत्तराखंड में छह बाघों ने दम तोड़ा था। इनमें पौड़ी जिले में एक बाघ की मौत दुर्घटना में हुई थी।

एक की मौत आपसी संघर्ष और चार की मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया था। आखिरी घटना तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले पीपल पड़ाव रेंज में हुई थी। फतेहपुर रेंज में ही अप्रैल-2020 में एक बाघ का शव मिला था। इस साल की बाघ की मौत की पहली घटना है।

कई वन्यजीवों की हो चुकी मौत

कुछ दिनों के अंदर कई वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। इसमें एक हाथी और एक बाघ की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के अंतर्गत गौला रेंज में 21 दिसंबर को करंट लगने से हाथी की मौत हो गई थी। डब्लपीएसआई के अनुसार 26 दिसंबर को पीपलपड़ाव रेंज में एक बाघिन का शव मिला था।

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