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उत्तराखंड: चालदा महासू महाराज की डोली यात्रा में शामिल हुए पर्यटन मंत्री, उमड़े हजारों श्रद्धालु
Mon, 22 Nov 2021 03:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 22 Nov 2021 03:59 PM IST
सार
चकराता स्थित जौनसार बावर क्षेत्र के मोहना धाम में सोमवार को श्री चालदा महासू महाराज के दर्शनों और उनकी पावन डोली यात्रा में शामिल होने के लिए भक्तों का जनसमूह दिखाई दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज सोमवार को जौनसार बावर क्षेत्र स्थित मोहना धाम पहुंच कर चालदा महासू महाराज के दर्शन करने के साथ-साथ डोली यात्रा में भी शामिल हुए।
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भक्तों का भारी जनसमूह दिखाई दिया
चकराता स्थित जौनसार बावर क्षेत्र के मोहना धाम में सोमवार को श्री चालदा महासू महाराज के दर्शनों और उनकी पावन डोली यात्रा में शामिल होने के लिए भक्तों का भारी जनसमूह दिखाई दिया। इस अवसर पर प्रदेश के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने धार्मिक आयोजन में प्रतिभाग किया।
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इस अवसर पर सतपाल महाराज ने कहा कि महासू देवता जौनसार बाबर जनजाति क्षेत्र ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश तक माने जाने वाले देवों के देव इष्ट देव हैं। उन्होंने बताया कि चार भाई महासू में से चालदा महासू महाराज पवित्र मोहना धाम के भवन में विराजमान थे जो कि अब यहां से समाल्टा के लिए प्रस्थान कर चुके हैं।
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दो वर्ष मोहना में रहने के बाद महासू महाराज की डोली ने किया प्रस्थान
कहा कि चालदा महाराज का आगमन मोहना गांव में 36 साल के बाद 23 नवंबर 2019 में हुआ था। लगभग दो वर्ष मोहना में रहने के पश्चात सोमवार को श्री चालदा महासू महाराज की पावन डोली ने समाल्टा के लिए प्रस्थान किया।सतपाल महाराज ने कहा कि उनके लिए यह सौभाग्य की बात है कि उन्हें भी इस धार्मिक अनुष्ठान और चालदा महासू महाराज की डोली यात्रा में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ है।
मोहना गांव सात खतों मोहना, द्वार, विशलाड, बोंदूर, तपलाड, अटगांव और बंणगांव का मुख्य केंद्र है। धार्मिक मान्यता है कि हूंणा भाट ब्राह्मण द्वारा खेत में चौथी सींह (हल की रेखा) लगते ही चालदा महाराज स्वयं ही प्रकट हुए थे। चालदा महाराज हमेशा क्षेत्र भ्रमण पर रहते हैं। वह एक स्थान पर अधिक समय तक निवास नहीं रहते, इसलिए उन्हें चालदा महाराज कहा जाता है।