उत्तराखंडः ‘गायब’ हो गए हजारों वाहन मालिक, अब टैक्स वसूली के लिए भटक रहे परिवहन विभाग के कर्मचारी
कोरोना काल में परिवहन विभाग राजस्व वसूली में पिछड़ गया है। यहां सबसे ज्यादा राजस्व नुकसान का आंकड़ा टैक्स वसूली का है। प्रदेशभर में तमाम ऐसे मामले हैं, जिनमें जिन पतों पर वाहनों के पंजीकरण हुए हैं, वहां मालिक रहते ही नहीं हैं। यानी टैक्स चोरी के लिए लोगों ने अपने वाहनों के पंजीकरण गलत पतों पर करा रखे हैं। अब विभाग के कर्मचारी इनकी तलाश में भटक रहे हैं।
परिवहन विभाग को पिछले साल सितंबर तक बीते वर्ष की तुलना में 47.16 प्रतिशत राजस्व का नुकसान हुआ था। यह आंकड़ा अभी भी बरकरार है। इसमें भी विभाग को सबसे अधिक नुकसान टैक्स का हुआ है। कारण यह कि कोरोना के कारण प्रदेश सरकार ने वाहनों के टैक्स में गत सितंबर तक की छूट दी गई थी। इसके अलावा वाहनों की बिक्री से मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हुआ है।
यहां से मिलता है राजस्व
परिवहन विभाग को वाहनों के पंजीकरण, नवीनीकरण, लाइसेंस फीस और ग्रीन सेस आदि के रूप में राजस्व मिलता है। इस राजस्व से कर्मचारियों का वेतन देने के साथ ही सड़क सुरक्षा कार्य भी कराए जाते हैं। फिलहाल विभाग के राजस्व की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दरअसल, कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन के बाद परिवहन विभाग का काम भी प्रभावित हुआ। पिछले साल जून अंत में जब विभाग खुलने शुरू हुए तो भी परिवहन विभाग में बहुत कम काम हुआ। अब जब सारी चीजें खुल चुकी हैं तो परिवहन विभाग ने अभी तक के राजस्व का डाटा निकाला।
200 करोड़ से ऊपर का नुकसान
पिछले साल सितंबर तक विभाग को 200 करोड़ रुपये से ऊपर के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक 117 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान विभिन्न वाहनों से मिलने वाले टैक्स से हुआ है। कोरोनाकाल के दौरान वाहनों का संचालन बहुत कम हुआ। ऐसे में व्यावसायिक वाहन चालकों की आर्थिक हालत को देखते हुए सरकार ने टैक्स माफ कर दिया था। इसके अलावा विभाग को विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली फीस में 36 करोड़ और ड्राइविंग लाइसेंस से मिलने वाली फीस में भी 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बड़ी संख्या केयर ऑफ वालों की
परिवहन विभाग के कर्मचारियों की सबसे ज्यादा परेशानी वाहनों के टैक्स की वसूली में आ रही है। दरअसल, वाहनों के पंजीकरण में जो पते दिए गए हैं, उनमें बड़ी संख्या ऐसे पतों की है जो कि केयर ऑफ यानी किसी और के यहां के दिए गए हैं। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जब उस जगह वसूली का नोटिस भेजा जाता है तो वह वापस आ जाता है। इस वजह से वसूली नहीं हो पा रही है।
कई जगह टैक्स के आंकड़ों पर भी सवाल
परिवहन विभाग के कई जिलों के टैक्स के आंकड़े भी सवालों के घेरे में हैं। जैसे उत्तरकाशी में पिछले तीन साल से दो लाख 85 हजार रुपये ही बकाया दिखाया जा रहा है जबकि यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। हालांकि, विभाग के अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं।
प्रदेश में परिवहन विभाग के 19 चेकपोस्ट, 13 ही सक्रिय
उत्तराखंड परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश में एंट्री टैक्स (प्रवेश शुल्क) लेने के लिए बनाई गई चेकपोस्ट पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पा रही हैं। स्थिति यह है कि विभाग में स्वीकृत 19 चेकपोस्ट में से केवल 13 ही सक्रिय हैं। शेष छह फिलहाल बंद हैं। इतना ही नहीं इन सभी को कंप्यूटरीकृत करने की मंशा भी परवान नहीं चढ़ पाई है। प्रदेश में आने वाले विभिन्न मार्गों में एंट्री टैक्स वसूलने के लिए परिवहन महकमे ने जगह-जगह चेकपोस्ट बनाई हुई हैं। इन चेकपोस्टों से विभाग चार करोड़ रुपये से अधिक की सालाना कमाई करता है।