देहरादून : 35 अधिकारियों के टीमों ने दस बिल्डरों के प्रतिष्ठानों पर मारे छापे, बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी
- 100 करोड़ के फ्लैट्स व बिल्डिंग मैटेरियल की बिक्री में करीब 12 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी
- एक बिल्डर ने 16 लाख रुपये किए सरेंडर, बड़ी संख्या में दस्तावेज हुए जब्त
- कई बिल्डरों के रजिस्ट्री में गड़बड़ी कर स्टांप चोरी की भी आशंका
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विस्तार
राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने मंगलवार को देहरादून के बिल्डरों के दफ्तरों पर छापेमारी की। इस दौरान 12 करोड़ से ऊपर की टैक्स चोरी पकड़ी गई। कई बिल्डरों के टैक्स चोरी के बड़े खेल भी सामने आए हैं।
मंगलवार को सुबह से ही जीएसटी के 35 अधिकारियों की टीमों ने दून के दस नामी बिल्डरों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा। अचानक हुई कार्रवाई से बिल्डरों में हड़कंप मच गया। जीएसटी अधिकारियों ने बड़ी तादाद में दस्तावेज जब्त कर लिए।
प्राथमिक जांच में बिल्डरों के 100 करोड़ कीमत के फ्लैट्स और बिल्डिंग मैटेरियल की बिक्री में करीब 12 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ में आई है। एक बिल्डर ने चोरी स्वीकार करते हुए 16 लाख रुपये सरेंडर भी किए हैं।
ऐसे खेल आए पकड़ में
1-एक बिल्डर का जीएसटी पंजीकरण दो साल से रद्द है। इसके बावजूद बिल्डर लगातार अपने फ्लैट्स बेच रहा है। जीएसटी अधिकारियों के मुताबिक, इस बिल्डर के कालीदास रोड और बलबीर रोड पर प्रोजेक्ट चल रहे हैं। उन्होंने 16 लाख रुपये सरेंडर किए हैं।
2-एक बिल्डर बिना जीएसटी पंजीकरण कराए ही फ्लैट्स बेच रहा है। बिल्डर के दफ्तर से बड़ी तादाद में ऐसे दस्तावेज जब्त कर जांच की जा रही है।
3-कुछ बिल्डर ऐसे भी पकड़ में आए हैं, जिन्होंने मूल्य घटाने के लिए फ्लैट के क्षेत्रफल को कम करके दिखाया ै। कम एरिया की रजिस्ट्री कराई है। जिस कारण फ्लैट का मूल्य घटकर, वास्तविक मूल्य से काफी कम हो गया है। सरकार को स्टांप शुल्क की हानि हुई है।
4-कामर्शियल कांप्लेक्स में चल रही दुकानों से कम किराया दिखाकर या बचाकर जीएसटी की चोरी की जा रही है। ऐसे लोगों के बैंकों की पूरी जानकारी खंगाली जा रही है ताकि असल मायने में जीएसटी चोरी का आकलन किया जा सके।
छापे में यह टीम रहीं शामिल
अपर आयुक्त अनिल सिंह के निर्देशों पर उपायुक्त यशपाल सिंह, सहायक आयुक्त जयदीप सिंह रावत, राज्य कर अधिकारी सुनील रावत, धरेंद्र कुमार, मोनिका पंत, पराक्रम प्रसाद, संगीता बिजल्वाण, ऑडिट शाखा के उपायुक्त भुवन पांडेय, विनय पांडेय, आशीष ठाकुर, आशीष उपाध्याय, अजय बिरथरे, अवधेश पांडेय, संजीव त्रिपाठी, अंजली गुसाईं, सौरभ तिवारी, निखिलेश श्रीवास्तव।
दो महीने की कड़ी मेहनत का नतीजा
राज्य कर विभाग को लंबे समय से बिल्डरों की मनमानियों और कर चोरी की सूचनाएं मिल रहीं थीं। विभाग की जांच टीमें दो महीने से ऐसे बिल्डरों की कुंडली तैयार कर रहीं थीं। मंगलवार को सभी के प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापा मारा गया।
पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई
राज्य कर विभाग की ओर से पहली बार बिल्डरों की इस तरह टैक्स चोरी पकड़ने के लिए कार्रवाई अमल में लाई गई है। विभाग का कहना है कि प्रदेशभर में यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जहां भी कर चोरी की आशंका होगी, वहां छापा मारकर कार्रवाई की जाएगी।
इधर-उधर फोन लगाने में लगे रहे बिल्डर
जैसे ही राज्य कर विभाग की टीमों ने बिल्डरों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा तो बिल्डरों में हड़कंप मच गया। वह सिफारिशें लगाने के लिए इधर से उधर फोन करते नजर आए। हालांकि कहीं से भी राहत नहीं मिल पाई।