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उत्तराखंड: नई सरेंडर पॉलिसी लागू होने से वाहन संचालकों के सामने गंभीर संकट
Fri, 06 Aug 2021 03:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 06 Aug 2021 03:47 PM IST
सार
संचालकों की यूनियनों द्वारा इस बात की मांग लगातार की जा रही है कि कोरोना संकट के मद्देनजर गाड़ियों के सरेंडर करने की स्थिति में टैक्स और पेनाल्टी माफ की जाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
परिवहन विभाग की ओर से व्यावसायिक गाड़ियों की सरेंडर पॉलिसी में बदलाव किए जाने के चलते संचालकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कोरोना संकट के बीच व्यावसायिक गाड़ी संचालकों अपनी गाड़ियों को सरेंडर करना चाह रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से अधिकतम सिर्फ 6 माह के लिए गाड़ियों के सरेंडर की नीति होने से संचालक खासे परेशान हैं।
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संचालकों की यूनियनों द्वारा इस बात की मांग लगातार की जा रही है कि कोरोना संकट के मद्देनजर गाड़ियों के सरेंडर करने की स्थिति में टैक्स और पेनाल्टी माफ की जाए। ताकि, गाड़ी संचालकों को राहत मिल सके। प्रावधानों पर नजर डालें तो वर्तमान में परिवहन विभाग की ओर से एक साल में सिर्फ तीन माह के लिए गाड़ियों के सरेंडर की छूट दी गई है। यदि किसी वाहन स्वामी को तीन माह से अधिक गाड़ियों को सरेंडर कर आना है तो उसके लिए निर्धारित शुल्क जमा करने के साथ ही नए सिरे से आवेदन करना होगा। इतना ही नहीं नए प्रावधानों के मुताबिक कोई भी गाड़ी संचालक साल में सिर्फ अधिकतम छह माह ही गाड़ियों को सरेंडर कर सकता है।
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बाकी बचे हुए छह महीने का उसे टैक्स देना होगा। यदि समय पर टैक्स का भुगतान नहीं किया जाता है तो टैक्स के साथ पेनाल्टी भी देनी होगी। व्यावसायिक गाड़ी संचालक इसी का विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि गाड़ियों के सरेंडर को लेकर पूर्व में जो व्यवस्था की गई थी, उसे ही लागू किया जाए। बता दें कि पूर्व में व्यवस्था थी कि एक बार गाड़ियों को सरेंडर करने के बाद उसे वाहन स्वामी जब तक चाहे सरेंडर कर सकता है, लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है।
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गाड़ियों के सरेंडर पालिसी में बदलाव किए जाने से संचालकों के सामने गंभीर आर्थिक संकट है। कोरोना संकट के बीच गाड़ियों का संचालन नहीं होने के बावजूद संचालकों को टैक्स का भुगतान करना पड़ रहा है, जो संचालकों के लिए गंभीर संकट है। सरकार, शासन, परिवहन विभाग को पुरानी सरेंडर पॉलिसी को ही लागू करना चाहिए। ताकि, गाड़ी संचालकों को राहत मिल सके।
- विजयवर्धन डंडरियाल, अध्यक्ष, देहरादून महानगर सिटी बस सेवा महासंघ