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उत्तराखंड: ब्रिटिश काल में बनी सड़क आधुनिक तकनीक को दे रही टक्कर, बहुत कम होता है भूस्खलन

Fri, 20 Aug 2021 02:57 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मुनीश रियाल, अमर उजाला, ऋषिकेश
मुनीश रियाल, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 20 Aug 2021 02:57 PM IST
सार

ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजों का बनाया गया 223 मील लंबा यात्रा मार्ग आज भी सड़क निर्माण की बेहतरीन तकनीक का उदाहरण बना हुआ है।

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uttarakhand news: road built during British era is giving competition to modern technology
ब्रिटिश शासनकाल में पौड़ी के द्वारीखाल ब्लॉक में पहाड़ काटकर बनाया गया पैदल मार्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग आए भूस्खलन और चट्टान गिरने से अवरुद्ध हो जाता है। कई घंटों तक यात्री सड़क मार्ग पर फंसे रहते हैं। जबकि हमारे पास आज सड़क निर्माण की उन्नत तकनीक है।

वहीं ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजों का बनाया गया 223 मील लंबा यात्रा मार्ग आज भी सड़क निर्माण की बेहतरीन तकनीक का उदाहरण बना हुआ है। इस पैदल मार्ग पर बरसात में बहुत कम भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाएं होती हैं। पैदाल यात्रा मार्ग पर बने डाट पुल (पत्थर और चूने से बनाए पुल) बनाए गए थे। पुलों में सीमेंट के बजाय, चूना और उड़द की दाल से चिनाई की गई थी।

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आज भी इस यात्रा मार्ग पर कई डाट पुल सही सलामत खड़े हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर आपदा के कारण गॉर्डर पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सड़क पर जो पुश्ते लगाए गए थे, वे आज भी काफी मजबूत हैैं। इसलिए पैदल यात्रा मार्ग पर भूस्खलन और चट्टा गिरने की घटनाएं बहुत कम होता थी। गंगा के समांतर बने इस पैदल यात्रा मार्ग पर चलने के दौरान गंगा नदी के भी दर्शन होते हैं।

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ट्रैक नहीं बन पाया ऋषिकेश-बदरीनाथ पैदल यात्रा मार्ग 

ऋषिकेश-बदरीनाथ पैदल मार्ग को ट्रैक के रूप में पर्यटन विभाग विकसित नहीं कर पाया है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने तीन साल पहले ऋषिकेश-बदरीनाथ पैदल मार्ग को पर ट्रैक बनाने की घोषणा की थी। लेकिन घोषणा अभी तक धरातल नहीं उतर पाई है। वहीं स्थानीय लोगों ने एक बार नौडखाल से व्यासघाट तक के पैदल यात्रा मार्ग को ट्रैकिंग शुरू कराने की मांग तेज कर दी है।

ब्रिटिश शासनकाल में ऋषिकेश से बदरीनाथ की पैदल यात्रा संचालित करने के लिए 1905 में अंग्रेजों ने ऋषिकेश से पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के स्वर्गाश्रम, गरुड़चट्टी, नौडखाल, बंदरचट्टी, ढांगूगढ़, महादेवचट्टी, खंडकांडी, ब्यासघाट, भोटा, उमरासू, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ होते बदरीनाथ तक पैदल यात्रा मार्ग का निर्माण किया था।

1998 के कुंभ मेला होने तक यात्री इस मार्ग के रास्ते पैदल बदरीनाथ की यात्रा पर गए। राज्य गठन के बाद इस मार्ग को ट्रैक रूप में विकसित करने की मांग उठ रही है। यमकेश्वर ब्लॉक के नौडखाल, बंदरचट्टी से महादेव चट्टी तक 12 किमी, द्वारीखाल ब्लॉक के महादेवचट्टी से सिमालू, कांडीखंड तक 13 किमी ट्रैक को विकसित करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। करीब तीन साल पहले पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी इस पैदल मार्ग को ट्रैक के रूप में विकसित करने की घोषणा चुके हैं। लेकिन वह घोषणा हवा हवाई साबित हुई। 

पुराने बद्रीनाथ पैदल यात्रा मार्ग को नौडखाल से ब्यासघाट तक ट्रैक के रूप में विकसित करने की कर रहे मांग। पर्यटन मंत्री स्वयं सतपाल महाराज इस ट्रैक को पर्यटन के मानचित्र पर लाने, विकसित करने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन घोषणा भी मूर्त रूप नहीं ले सकी।
- उदय सिंह नेगी, अध्यक्ष, ढांगू विकास समिति द्वारीखाल ब्लॉक

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