ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे: पांच घंटे अवरुद्ध रहा हाईवे, 11 संपर्क मार्ग भी ठप, पहाड़ी से लगातार गिर रहा मलबा
रविवार को तड़के 4 बजे से तेज बारिश शुरू हुई जो लगभग सवा घंटे तक रही। इस दौरान ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे नरकोटा में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मलबा गिरने से बंद हो गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग नरकोटा में पहाड़ी से भारी भूस्खलन के कारण पांच घंटे बंद रहा। इस दौरान लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कतें हुईं। बीते शनिवार को भी हाईवे पूरे दिनभर बार-बार बाधित होता रहा। बरसात के कारण जिले में 11 संपर्क मोटर मार्ग भी दिनभर अवरुद्ध रहे।
उत्तराखंड : ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जेसीबी मशीन पर पहाड़ी से गिरा मलबा, चालक गंभीर घायल
हाईवे बंद होने से यहां सुबह 5 बजे से वाहनों की दो तरफा लंबी लाइन लगने लगी थी। साथ ही खांकरा, फतेहपुर, नौगांव के ग्रामीणों को रुद्रप्रयाग आने में दिक्कत हुई। इस दौरान कई ग्रामीण जंगल के रास्ते पैदल नरकोटा से रैंतोली होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंचे। एनएच व कार्यदायी संस्था की ओर से 6 बजे से मलबा सफाई का कार्य शुरू किया गया और सुबह 9 बजे हाईवे यातायात के लिए खोल दिया गया।
उधर, रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग भी कई स्थानों पर संवेदनशील बना हुआ है। बांसवाड़ा, सेमी-भैंसारी, नारायणकोटी, चंडिकाधार, शेरसी और सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच राजमार्ग की स्थिति अच्छी नहीं है।
दूसरी तरफ बरसात से रुद्रप्रयाग-चोपड़ा-कुरझण, जसोली-कांडा, खांकरा-कांडई-खेड़ाखाल, नगरासू-डांडाखाल, जखनोली बैंड-कुरछोला, अंदरगढ़ी-धारतोलियूं, तोणीधार-पेलिंग, आश्रम-घरड़ा-मखेत, गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटा-जाल-चौमासी, शिवानंदी-सिमतोली, बागा-कंडारा मोटर मार्ग समेत 11 संपर्क मोटर मार्ग भी बंद पड़े हैं। बता दें कि बीते शनिवार को जिले में 26 संपर्क मार्ग बाधित हो गए थे। इसमें से 15 मार्गों पर कार्यदायी संस्थाओं के द्वारा यातायात बहाल कर दिया गया है।
बारिश से ग्रामीणों के खेतों में घुसा मलबा, सड़कें हुई अवरुद्ध
शनिवार रात हुई मूसलाधार बारिश से प्रखंड की दिचली-गमरी पट्टी के दर्जनों गांव में ग्रामीणों की कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। वहीं स्यांसू मणि व चिन्यालीसौड़ जोगत मोटर मार्ग मलबा व बोल्डर आने से अवरुद्ध हो गए, जिन्हें रविवार दिन में करीब 14 घंटे बाद खोला गया।
विकासखंड चिन्यालीसौड़ में डेढ़ माह में तीसरी बार मूसलाधार बारिश से भारी नुकसान हुआ है। बारिश से कुमराडा गांव में तीसरी बार पेयजल लाइन ध्वस्त हो गई। वहीं घरों, खेतों में पानी घुसने से काश्तकारों की खेतों में खड़ी फसल चौपट हो गई है। उधर, बल्डोगी, खालसी, गढ़वालगाड, तल्ला जोगत, क्यारी- दिचली, गोरण-कावागढ़ी में कृषि भूमि में बारिश का पानी घुसने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
वहीं बारिश के चलते स्यांसू-मणि मोटर मार्ग कुमराड़ा और बल्डोनी के पास व चिन्यालीसौड़ जोगत मोटर मार्ग पर भी मलबा व बोल्डर आने से अवरुद्ध हो गया, जिसे रविवार दिन में खोला गया। गढ़वाल गाड़ गांव के बिशन कोटवाल, पल्ला जोगत की सुनैना रावत, कुमराड़ा के विनोद पुरसोड़ा, बल्डोगी के शांति सिंह राणा ने बताया कि बारिश का पूरा पानी उनके खेतों में घुस गया। इधर, क्षेत्र में बारिश से नुकसान की खबर पर यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने रविवार को कई गांवों का भ्रमण कर नुकसान का जायजा लिया। तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि प्रभावित गांवों में क्षति के आंकलन के लिए राजस्व विभाग की टीम भेजी गई है।
सात घंटे बंद रही पिथौरागढ़-घाट बारहमासी सड़क
चुपकोट बैंड पर मलबा आने से पिथौरागढ़-घाट बारहमासी सड़क फिर से बंद हो गई। रविवार सुबह चार बजे से 11 बजे तक इस मार्ग पर यातायात ठप रहा। इस दौरान, दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
पिथौरागढ़-घाट सड़क पिथौरागढ़ जिले की जीवन रेखा मानी जाती है। बारहमासी सड़क का काम अब लगभग पूरा हो चुका है लेकिन यह सड़क पिथौरागढ़ से घाट तक लगभग पांच स्थानों पर पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण खतरनाक बनी हुई है। सड़क का सबसे संवेदनशील स्थान चुपकोट बैंड है। इस स्थान पर पहाड़ी से लगातार मलबा और बोल्डर गिर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह के भीतर चार बार मलबा आने से सड़क बंद हो चुकी है।
शनिवार की देर रात भी यहां भारी मात्रा में मलबा आ गया। इसके चलते रविवार की सुबह यातायात प्रभावित रहा। तड़के चार बजे पिथौरागढ़ से टनकपुर और हल्द्वानी के लिए निकले वाहन मार्ग पर फंस गए। मैदानी क्षेत्रों से आ रहीं टैक्सियों के साथ ही दूध, सब्जी, गैस और राशन सहित ट्रांसपोर्ट के दर्जनों ट्रकों की लंबी कतार लग गई। एनएच विभाग ने मलबा हटाने के लिए जेसीबी भेजी। सड़क के मलबा हटाया जाता, उपर से बोल्डर गिरते रहते, इससे सड़क खोलने में काफी परेशानी हुई। 11 बजे सड़क खोली गई।
बरसात में बड़ी मुसीबत न बन जाए चुपकोट बैंड
30 किलोमीटर लंबे पिथौरागढ़-घाट सड़क पर गुरना से लेकर घाट तक कुछ स्थानों पर लगातार पत्थर गिरने का खतरा रहता है। ऐसे में बरसात में यह सड़क बड़ी मुसीबत साबित हो सकती है। चुपकोट बैंड में जिस तरह से पहाड़ी दरक रही है, उसे देखते हुए एनएच के अधिकारियों ने इस स्थान पर पहाड़ी के उपचार के साथ ही मजबूत सुरक्षा दीवारों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा है। अभी तक इस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में जब तक पहाड़ी का उपचार नहीं होता है तब तक सीमांत के लोगों को बरसात में बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।