उत्तराखंड: बड़े शहरों के लोगों को भाया चमोली की ट्राउट का स्वाद, लगातार बढ़ रही डिमांड
ट्राउट मछली का उत्पादन लगभग 4000 फीट की ऊंचाई के क्षेत्रों में होता है। चमोली जनपद की जलवायु मत्स्य पालन के लिए मुफीद है।
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चमोली की ट्राउट मछली का स्वाद दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों के लोगों खूब भा रहा है। यही कारण है कि मछली की डिमांड लगातार बढ़ रही है। कई बड़ें शहरों से व्यापारी मछली खरीदने के लिए खूब चमोली का चक्कर लगा रहे हैं। इसी का असर है कि मत्स्य पालन कर रहे किसानों की आय पांच साल में ढाई गुना हो गई है। पिछले एक साल में जिले के काश्तकार करीब 25 क्विंटल मछलियां बेच चुके हैं और कई बड़े आर्डर अभी उनके हाथ में हैं।
ट्राउट मछली का उत्पादन लगभग 4000 फीट की ऊंचाई के क्षेत्रों में होता है। चमोली जनपद की जलवायु मत्स्य पालन के लिए मुफीद है। यहां मौजूदा समय में 600 से अधिक काश्तकार मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं। जनपद में मत्स्य पालन का कारोबार खूब फलफूल रहा है। वर्ष 2017 में मत्स्य पालकों की आय प्रतिवर्ष करीब 60 लाख रुपये थी। यह आंकड़ा बढ़कर 2020 में डेढ़ करोड़ रुपये पहुंच गया था।
उत्तराखंड के अलावा कई और राज्यों में भी ट्राउट मछली डिमांड बढ़ रही है। दिल्ली की फ्रेश एंड फ्रोजन और मुंबई की स्वीट स्टफ एजेंसी को काश्तकार 20 क्विंटल ट्राउट मछली उपलब्ध करा चुके हैं। मत्स्य पालन केंद्र वाण की ओर से बंगलूरू की एक संस्था को पांच कुंतल मछली उपलब्ध कराई जा चुकी है। जबकि केंद्र को 18 क्विंटल की डिमांड दोबारा मिली है।
मत्स्य पालन विभाग के उप निदेशक (गढ़वाल) गणेश जोशी ने बताया कि चमोली जनपद में काश्तकारों का मत्स्य पालन में रुझान बढ़ रहा है। जिले के वाण, सुतोल, बैरागना, सितेल, तांगला और सुरांईथोटा में मत्स्य पालन के तालाब स्थापित किए गए हैं। इन तालाबों में बड़ी मछली के साथ ही प्रतिवर्ष करीब 8 लाख मछलियों के बीजों का उत्पादन किया जाता है।
मौजूदा समय में करीब 600 लोग मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं। जबकि आठ समितियां और 30 काश्तकार अपनी भूमि पर ट्राउट मछली के 122 तालाब तैयार कर रहे हैं। काश्तकारों को जिला प्रशासन की ओर से फिश आउटलेट और फिश कैफे के माध्यम से मछली बिक्री केंद्र की सुविधा भी दी गई है।
दून में उत्तराफिश नाम से बिक रही ट्राउट
चमोली जिले में उत्पादित ट्राउट मछली देहरादून में उत्तराफिश के नाम से बेची जा रही है। देहरादून के मछली व्यापारी खुद ही काश्तकारों से मछली खरीदने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। मत्स्य पालन में जुटे काश्तकार मोहन सिंह का कहना है कि ट्राउट मछली की डिमांड बढ़ रही है। जिले के स्थानीय बाजारों में भी मछली की अच्छी डिमांड है।
ठंडे इलाकों में होता है उत्पादन
ट्राउट मछली ठंडे इलाकों में उत्पादित होती है। उत्तराखंड में चमोली के अलावा रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी जैसे जनपदों में ट्राउट मछली का उत्पादन होता है। बाजार में एक किलो मछली 800 रुपये तक बिक रही है। प्रभारी निदेशक मत्स्य जगदंबा प्रसाद का कहना है कि ऊंचाई वाले इलाकों की वे नदियां जिनमें पानी तेजी से बहता है और जिन नदियों का पानी बहुत ठंडा होता है, उनमें में ही ट्राउट मछलियां पाई जातीं हैं।