फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand news : now harish rawat and pritam singh is responsible for 2022 assembly elections

उत्तराखंड : कांग्रेस पर नियति की मार, अब हरीश-प्रीतम पर  2022 के विधानसभा चुनाव का दारोमदार

Mon, 14 Jun 2021 02:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 14 Jun 2021 02:50 PM IST
सार

दरअसल, एक दिन पहले ही पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव ने पार्टी के तीनों क्षत्रपों पूर्व मुख्यमंत्री व एआईसीसी के महा सचिव हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरने का पाठ पढ़ाया था।

विज्ञापन
uttarakhand news : now harish rawat and pritam singh is responsible for 2022 assembly elections
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी प्रदेश कांग्रेस की कद्दावर नेत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश के असामयिक निधन से कांग्रेसी सदमे में हैं। इसे नियति की मार ही कहेंगे कि अपने जिन क्षत्रपों के दम पर कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थी, उनमें से एक क्षत्रप इंदिरा हृदयेश नहीं रही। 

विज्ञापन


सियासी जानकारों का मानना है कि अब कांग्रेस की पूरी चुनावी सियासत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर केंद्रित हो गई है। ऐसी संभावना है कि कांग्रेस आलाकमान अब राज्य में हरीश रावत का ज्यादा उपयोग करेगा।
विज्ञापन


इंदिरा का अवसान कांग्रेस आलाकमान के लिए भी यह एक बड़ी क्षति है। दरअसल, एक दिन पहले ही पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव ने पार्टी के तीनों क्षत्रपों पूर्व मुख्यमंत्री व एआईसीसी के महा सचिव हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरने का पाठ पढ़ाया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सियासी जानकारों का मानना है कि अभी तक पार्टी आलाकमान प्रदेश और प्रदेश के बाहर हरीश रावत का उपयोग कर रहा था। उन्हें पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। लेकिन उत्तराखंड में अब विधानसभा चुनाव बहुत दूर नहीं है। नवंबर महीने में कभी भी चुनाव आचार संहिता लागू हो सकती है। ऐसे में कांग्रेस आलाकमान हरीश रावत को विधानसभा चुनाव के लिहाज से उत्तराखंड में अधिक से अधिक उपयोग कर सकता है। दरअसल, अब कांग्रेस की चुनावी सियासत हरीश रावत और प्रीतम पर केंद्रित हो गई है। 

जहां तक कुमाऊं में सियासी खालीपन का सवाल है तो राजनीतिक अनुभव के तौर पर इंदिरा बेशक कांग्रेस में हरीश रावत से भी पुरानी नेता रही हैं। लेकिन राज्य के नेता के तौर पर जो धाक और स्वीकार्यता हरीश रावत की है, वो इंदिरा की नहीं रही। इंदिरा का कुमाऊं की राजनीति में तो दखल रहा लेकिन वैसा प्रभाव नहीं दिखा जैसा हल्द्वानी और ऊधमसिंह नगर में रहा।

कद और प्रभाव के लिहाज हरीश रावत को कुमाऊं की राजनीति तक सीमित नहीं किया जा सकता। वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री रहे हैं और वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं। पार्टी का उनका उपयोग व्यापक रूप में ले सकती है। सियासी जानकारों का मानना है कि कुमाऊं में पार्टी के दो प्रमुख नेता विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल व विधायक करन माहरा हैं, जिनमें से किसी एक पार्टी नेता प्रतिपक्ष बनाकर कुमाऊं की जिम्मेदारी सौंप सकती है।


अब कोई उठापटक नहीं
वर्तमान में जो राजनीतिक हालात बने हैं, उनके रहते अब प्रदेश कांग्रेस में किसी तरह की उठापटक की संभावनाएं कम ही हैं। हरीश रावत और प्रीतम सिंह अब कांग्रेस आलाकमान की उम्मीदें हैं, जिनके दम पर पार्टी मिशन 2022 में उतरेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed