{"_id":"604ee9fce0f51c3c2b210157","slug":"uttarakhand-news-no-review-of-newborn-deaths-in-any-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंडः प्रदेश के किसी भी अस्पताल में नवजातों की मृत्यु की समीक्षा नहीं, स्वास्थ्य रिपोर्ट में हुआ खुलासा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंडः प्रदेश के किसी भी अस्पताल में नवजातों की मृत्यु की समीक्षा नहीं, स्वास्थ्य रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Mon, 15 Mar 2021 10:40 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
भूपेंद्र राणा, अमर उजाला, देहरादून
भूपेंद्र राणा, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 15 Mar 2021 10:40 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
प्रदेश में नवजात शिशु और मातृ मृत्यु किन कारणों से हुई है, इसकी अस्पतालों में समीक्षा नहीं की जा रही है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। प्रदेश में वर्ष 2014 से 2019 तक 143 नवजात शिशुओं की मौत हुई है। इन मामलों की अस्पतालों में कोई समीक्षा नहीं की गई है। ऐसा तब है जब स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से खास तौर पर नवजात और मातृ मृत्यु की अनिवार्य रूप से डेथ और क्लीनिकल ऑडिट करने के निर्देश हैं।
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प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) मानकों को लागू कर दिया है। आईपीएचएस के अनुसार सभी चिकित्सालयों में होने वाली शिशु व मातृ मृत्यु की समीक्षा करनी अनिवार्य है। 2014 से 2019 तक अल्मोड़ा, हरिद्वार, चमोली, ऊधमसिंह नगर जिले में 143 नवजात शिशुओं की मौत हुई है।
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इनमें सबसे अधिक मौत हरिद्वार जिले में हुई हैं, लेकिन एक भी प्रकरण की समीक्षा नहीं की गई। नवजात की मृत्यु की वजह क्या नहीं रही। इसका डेथ आडिट और क्लीनिकल आडिट से पता नहीं किया गया। कैग की जिला चिकित्सालयों की स्वास्थ्य रिपोर्ट में पर सवाल उठाए गए हैं।
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अस्पतालों में नवजात व मातृ मृत्यु की डेथ और क्लीनिकल ऑडिट की जाती है। सीएमओ की अध्यक्षता में एक समिति बनी होती है, जो मौत के कारणों की समीक्षा करती है। यदि किसी अस्पताल में शिशु व मातृ मृत्यु की समीक्षा नहीं की जा रही है तो उस पर सभी सीएमओ को निर्देश दिए जाएंगे।
- डॉ. तृप्ति बहुगुणा, स्वास्थ्य महानिदेशक
शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए केंद्र की ओर से अस्पतालों में होने वाली मौत की अनिवार्य रूप से डेथ और क्लीनिकल आडिट करने के निर्देश दिए हैं। - डॉ. सरोज नैथानी, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
जिला - नवजात की मृत्यु संख्या
अल्मोड़ा - 09
हरिद्वार - 68
चमोली - 33
ऊधमसिंह नगर - 33
कुल - - 143
प्रति एक हजार प्रसव पर 30 नवजात की मौत
नीति आयोग की स्वस्थ राज्य प्रगतिशील भारत-2019 की रिपोर्ट में उत्तराखंड में प्रति एक हजार प्रसव पर 30 नवजात और 38 शिशुओं की मौत हो रही है। वहीं मातृ मृत्यु का अनुपात प्रति एक लाख पर 201 है।