उत्तराखंड : देहरादून में नियो मेट्रो को मिली हरी झंडी, शासन को जाएगा प्रस्ताव
उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की बोर्ड बैठक में पास हुई मेट्रो नियो की डीपीआर, अब शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार
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दरअसल, केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद दिल्ली मेट्रो की मदद से उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूकेएमआरसी) देहरादून में कम लागत वाली मेट्रो नियो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की थी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इस डीपीआर को आंशिक संशोधन के साथ पास कर दिया गया।
यूकेएमआरसी के एमडी जितेंद्र त्यागी ने बताया कि फिलहाल डीपीआर में आंशिक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद शासन को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा। सरकार इस पर फैसला लेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। आपको बता दें कि केंद्र को देहरादून के अलावा गोरखपुर, प्रयागराज, जम्मू, श्रीनगर, राजकोट, बड़ौदा, कोयम्बटूर, भिवाड़ी जैसे शहरों ने मेट्रो नियो के प्रस्ताव भेजे थे।
हरिद्वार-ऋषिकेश लोकल ट्रेन पर हुई चर्चा
मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सरकार के निर्देश पर हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच मुंबई की तर्ज पर लोकल ट्रेन चलाने पर काम शुरू किया है। बोर्ड बैठक में इस पर भी चर्चा हुई। इसके लिए रेल मंत्रालय से सभी संभावनाओं पर बात करने को कहा गया है।
काफी कम खर्च में तैयार हो जाएगी मेट्रो नियो
सामान्य मेट्रो के मुकाबले मेट्रो नियो को बनाने में काफी कम खर्च आता है। अभी एक एलिवेटेड मेट्रो को बनाने में प्रति किलोमीटर का खर्च 300-350 करोड़ रुपये आता है। अंडरग्राउंड में यही लागत 600-800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।
जबकि मेट्रो नियो या मेट्रो लाइट के लिए 200 करोड़ तक का ही खर्च आता है। चूंकि इसमें कम लागत आएगी, इसलिए इसमें यात्रियों को सस्ते सफर की सौगात भी मिलेगी। इसमें यात्रियों की क्षमता सामान्य मेट्रो से कम होगी, इसके लिए सड़क से अलग एक डेडिकेटेड कॉरिडोर तैयार किया जाएगा।
क्या है मेट्रो नियो
-मेट्रो नियो सिस्टम रेल गाइडेड सिस्टम है, जिसमें रबड़ के टायर वाली इलेक्ट्रिक कोच होंगे।
-इसके कोच स्टील या एल्युमिनियम के बने होंगे। बिजली जाने पर यह ट्रेन 20 किलोमीटर तक चल सकेगी, इतना पावर बैकअप होगा।
-सामान्य सड़क के किनारों पर फेंसिंग करके या दीवार बनाकर इसका ट्रैक तैयार किया जा सकेगा।
-इसमें ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम होगा, स्पीड लिमिट भी नियंत्रण में रहेगी।
-इसमें टिकट का सिस्टम क्यूआर कोड या सामान्य मोबिलिटी कार्ड से होगा।
-इसके ट्रैक की चौड़ाई आठ मीटर होगी। जहां रुकेगी, वहां 1.1 मीटर का साइड प्लेटफॉर्म होगा। आईसलैंड प्लेटफॉर्म चार मीटर चौड़ाई का होगा।
1966 में कनाडा में शुरू हुई थी पहली रबड़ टायर वाली मेट्रो
वर्ष 1966 में सबसे पहले कनाडा के मोंटेरियल में दुनिया की पहली रबड़ टायर वाली मेट्रो शुरू हुई थी। सेंटियागो मेट्रो और मैक्सिको सिटी मेट्रो भी इसके बाद शुरू हुई। 1983 में कई शहरों में बिना ड्राइवर की रबड़ मेट्रो शुरू हुई, जिसका संचालन सफल रहा। पेरिस मेट्रो भी वर्ष 2007 में चालक रहित हो गई।