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उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में तेजी से कम हो रहे साल के जंगल, वैज्ञानिक शोध में जुटे

Fri, 15 Jan 2021 10:14 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 15 Jan 2021 10:14 AM IST
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uttarakhand news : many states including Uttarakhand, Uttar Pradesh forests of sal are rapidly decreasing
वन अनुसंधान संस्थान - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार समेत देश के कई राज्यों में साल के जंगल तेजी से कम हो रहे हैं। इससे चिंतित केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन अनुसंधान संस्थान, इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्ट रांची और ट्रॉपिकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जबलपुर के वैज्ञानिकों को शोध के लिए कहा है। 

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वन मंत्रालय के निर्देश पर तीनों संस्थानों के वैज्ञानिकों की टीम साल के जंगलोेें में आई कमी के कारणों का पता लगाने में जुट गई हैं। वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के जंगलों में शोध कर रही है। भारतीय वन सर्वेक्षण के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे देश में आरक्षित वन क्षेत्र जहां 434853 वर्ग किलोमीटर है। वहीं, संरक्षित वन क्षेत्र का आंकड़ा 218924 वर्ग किलोमीटर है।
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जहां तक अवर्गीकृत वन का सवाल है तो देश में 113642 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में अवर्गीकृत वन है। देश में इतने अधिक क्षेत्रफल में फैले जंगलों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार के साथ ही उत्तरा-पूर्व के राज्यों में साल के जंगल बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, लेकिन साल दर साल उत्तराखंड समेत तमाम राज्यों में साल के जंगलों में कमी आ रही है।
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मेंलोटस, पिलेरोड्रेडरों, फ्लेमेंगिया के अत्यधिक दोहन से पड़ा असर

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वनस्पति विज्ञानी डॉ. वीके धवन की अगुवाई में किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि साल के जंगलों में पाए जाने वाले मेंलोटस, पिलेरोड्रेडरों, फ्लेमेंगिया, होलोपेलिया जैसी कई प्रजातियों के तेजी से खत्म होने की वजह से साल के जंगलों पर इसका सीधा असर पड़ा है। ये कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जो साल के जंगलों को बढ़ाने में सहायक होती हैं। अत्यधिक दोहन के चलते इन तमाम प्रजातियों पर संकट खड़ा होने से साल के जंगल भी तेजी से कम हो रहे हैं।

लैंटाना, पार्सेनियम साल के जंगलों के लिए बड़ा खतरा

वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों के जंगलों में लैंटाना, पार्सेनियम के साथ ही अजरेटम जैसी जंगली प्रजातियां  तेजी से बढ़ी हैं। इसका सीधा असर साल के जंगलों पर भी पड़ा है।


साल के जंगलों में तेजी से कमी चिंता का विषय है। कई संस्थानों के वैज्ञानिक इस दिशा में शोध कर रहे हैं। मेंलोटस, पिलेरोड्रेडरों, फ्लेमेंगिया जैसी सहायक वनस्पतियों के अत्यधिक दोहन से भी जंगलों पर असर पड़ा है। रही सही कसर लैंटाना, पार्सेनियम जैसी जंगली प्रजातियों ने पूरी कर दी है। फिलहाल, साल के जंगलों को बचाने के लिए मंत्रालय के स्तर पर तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।
- डॉ. वीके धवन, वरिष्ठ वनस्पति विज्ञानी, वन अनुसंधान संस्थान

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