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एक्सक्लूसिव : किसानों को मालामाल करेगा ताइवान से आयातित प्रजाति का कश्मीरी एप्पल बेर
Mon, 04 Jan 2021 04:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
सुरेंद्र कुमार वर्मा, अमर उजाला, पंतनगर
सुरेंद्र कुमार वर्मा, अमर उजाला, पंतनगर
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 04 Jan 2021 04:17 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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ताइवान से आयातित प्रजाति का कश्मीरी एप्पल बेर प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। ऊधमसिंह नगर के किच्छा के ग्राम नजीमाबाद में इसकी खेती भी शुरू हो गई है। काश्तकार नारायण चंद्र सरकार ने एक एकड़ जमीन में इस प्रजाति के पौधे लगाए हैं और एक साल के भीतर ही सभी पौधे फलों से लद गए हैं।
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नजीमाबाद निवासी नारायण ने अपनी बची जमीन पर भी इस प्रजाति की नर्सरी लगाने की बात कहते हैं। दरअसल विदेशी प्रजाति के बेर की खेती महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बंगाल, केरल आदि राज्यों में होती है। नारायण ने इसकी सफल खेती करके प्रदेश के अन्य किसानों को इसकी खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
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उन्होंने बीते मार्च में पंतनगर किसान मेले में पश्चिम बंगाल की शबनम नर्सरी से एक एकड़ जमीन के लिए 450 कश्मीरी एप्पल के पौधे लिए थे। पौधों का रोपण करने के आठ माह के भीतर पौधे पांच से छह फुट के होने के साथ फलों से लद गए। फसल तैयार होने में अभी डेढ़ माह का समय बचा है। लेकिन खेत में खड़े पौधों में लगे फलों को खरीदने के लिए क्षेत्र के व्यापारी अभी से मनमाने दाम देने को तैयार हैं। किसान के पास अभी तक 45 रुपये प्रति किलोग्राम तक के प्रस्ताव आ चुके हैं।
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हूबहू सेब की तरह दिखता है एप्पल बेर
ताइवान प्रजाति का एप्पल बेर रंग और आकार में हूबहू सेब की तरह दिखता है। खास बात यह है कि इसमें सेब और बेर दोनों का स्वाद आता है। एक वर्ष से भी कम समय में फलोत्पादन वाले इस एप्पल बेर की बागवानी कम ऊंचाई वाले पहाड़ (जहां न्यूनतम तापमान माइनस में न जाता हो) और मैदानी भागों में की जा सकती है।
इसके लिए एक एकड़ में 400-450 पौंधे और पौधों के बीच की औसत दूरी आठ फुट रखी जाती है। अधिकतम ऊंचाई के आठ फुट के एक पौधे में पहले साल 25 से 30 किलोग्राम और दूसरे वर्ष से 60 से 65 किलोग्राम फल लगते हैं। शुगर फ्री व विटामिन सी से भरपूर इस बेर का अधिकतम वजन 70 ग्राम तक होता है। इसके लिए प्राकृतिक बारिश के अलावा अन्य सिंचाई और उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती है। इसके पत्तों और डालियों में कांटे नहीं होते हैं।
ताइवानी प्रजाति के एप्पल बेर की बागवानी से किसान कम लागत पर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। मौजूदा समय में बाजार में इस प्रजाति के बेर की कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। एक एकड़ में किसान इस फसल से तीन से चार लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकता है।
- नारायण सिंह सरकार, ग्राम नजीबाबाद
उत्तराखंड के किसान ताइवानी प्रजाति के इस कश्मीरी एप्पल बेर की खेती करने के इच्छुक हैं तो वह अपनी नर्सरी से किसानों को उनके प्रक्षेत्र पर ही सस्ती दरों पर पौध उपलब्ध करा सकते हैं। लेकिन इसके लिए न्यूनतम साढ़े चार सौ पौधे खरीदने पड़ेंगे। एक पौधे के लिए महज 60 रुपये खर्च करने होंगे। मूल रूप से ताइवान की प्रजाति को कश्मीर में विकसित किया गया था। इस वजह से इसको कश्मीर एप्पल बेर का नाम दिया गया है। -आयन मंडल, स्वामी शबनम नर्सरी, कोलकाता
बंदर से फसल बचाने के उपाय
वैज्ञानिकों के अनुसार क्षेत्र में यदि बंदरों अथवा जंगली जानवरों से फसल को नुकसान होने की आशंका हो तो प्रक्षेत्र के चारों ओर विद्युत प्रवाहित तारों (इलेक्ट्रिक वायर फेंसिंग) लगाकर फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके अलावा सूक्ष्म कीटों और अन्य व्याधियों के लिए संस्तुत रसायनों का प्रयोग किया जा सकता है।