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दुर्गम प्रदेश हांफते पुल: रुद्रप्रयाग में सड़क और पुल के बीच कच्चा पुश्ता, सालों से फाइलों में टहल रहा प्रस्ताव

Fri, 23 Jul 2021 04:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 23 Jul 2021 04:00 PM IST
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uttarakhand news: in rudraprayag raw part between road and bridge, it is very dangerous
bridge - फोटो : अमर उजाला

सिस्टम की सुस्ती ने पहाड़ के मुश्किल जीवन को दुश्वार कर दिया है। सड़कों और पुलों को विकास का पैमाना कहा जाता है। इस पैमाने के हिसाब पहाड़ पर विकास सालों से हांफ रहा है। ऐसे कई नदी, नाले और गदेरे हैं जहां आज भी पुल नहीं हैं। सालों पहले आपदा में बह चुके कई पुल नहीं बन पाए हैं। ऐसे में बरसात के दौरान लोगों को जान हथेली पर लेकर इन नदी-नालों को पार करना पड़ता है। पहाड़ की इन दुश्वारियों को सामने लाने के लिए अमर उजाला ने इस अभियान की शुरुआत की है। पांचवीं कड़ी में पढ़िए... रुद्रप्रयाग जिले के लोगों की परेशानी।

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रुद्रप्रयाग में सड़क और पुल के बीच कच्चा पुश्ता
ऋषिकेश-बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाले 110 मीटर लंबे पुल को लोग जान हथेली पर लेकर पार कर रहे हैं। सड़क से पुल तक पहुंचने के लिए वाहन मिट्टी और पत्थर की दीवार (पुश्ते) से होकर गुजर रहे हैं। एक छोर पर रास्ता बेहद संकरा है, जिससे हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। यहां पक्के पुश्ते के निर्माण का प्रस्ताव तीन साल से फाइलों में टहल रहा है। 
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जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में रैंतोली बाईपास पर अलकनंदा नदी पर पुल का निर्माण बीआरओ ने 2017 में किया था। लेकिन एप्रोच पुश्तों का निर्माण नहीं किया गया। पुल के दोनों तरफ कच्ची दीवारों का निर्माण कर यातायात बहाल कर दिया गया। वहीं 2 जून 2018 को मूसलाधार बारिश से पुल की एक तरफ का एप्रोच पुश्ता ध्वस्त हो गया था। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल के स्थायी एप्रोच पुश्तों का निर्माण नहीं हो पाया है।
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जबकि चमोली जिले व रुद्रप्रयाग के केदारघाटी से आने वाले भारी व छोटे-बड़े वाहन इसी पुल से गुजरते हैं। पुल का एक छोर संकरा होने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ईश्वर सिंह बिष्ट, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी राणा, उक्रांद के राजेंद्र प्रसाद नौटियाल का कहना है कि पुल को लेकर बरती जा रही उदासीनता किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

वर्ष 2007 में स्वीकृत हुआ था बाईपास 
रुद्रप्रयाग। केंद्रीय सड़क व परिवहन राज्य मंत्री रहते हुए उत्तराखंड के पूर्व सीएम बीसी खंडूरी ने रुद्रप्रयाग में रैंतोली-जवाड़ी बाईपास स्वीकृत कराया था। वर्ष 2007 में स्वीकृत साढ़े तीन किमी लंबे बाईपास पर अलकनंदा व मंदाकिनी नदी पर दो मोटर पुल भी स्वीकृत हुए थे। मंदाकिनी नदी पर तो पुल बन गया, लेकिन अलकनंदा नदी पर पुल निर्माण वर्षों तक लटका रहा। स्थिति यह रही कि वर्ष 2012 में पुल का ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया। बाद में बीआरओ ने 2017 में आरसीसी पुल का निर्माण पूरा किया था।


बीआरओ से जब बाईपास व पुल हमें हस्तांतरित हुआ था, तब अनुबंध में पुल के एप्रोच पुश्तों का उल्लेख नहीं था। ये एप्रोच पुश्ते बीआरओ को बनाने थे। डिजायन के हिसाब से पुल के दोनों तरफ एप्रोच पुश्तों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही प्राथमिक से कार्य किया जाएगा। वैसे, व्यवस्था के तौर पर कच्चे पुश्तों के सहारे एप्रोच दी गई है।
-जितेंद्र त्रिपाठी अधिशासी अभियंता, एनएच, डिवीजन रुद्रप्रयाग

 

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