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Uttarakhand News : कर्मकार बोर्ड की पूर्व सचिव दमयंती रावत ऑडिट टीम के निशाने पर
Tue, 26 Jan 2021 11:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 26 Jan 2021 11:19 AM IST
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उत्तराखंड भवन सन्निर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड की पूर्व सचिव दमयंती रावत अकाउंटेंट जनरल (एजी) ऑडिट टीम के निशाने पर आ गई हैं। जांच के दौरान सामने आने वालीं वित्तीय गड़बड़ियों पर ऑडिट टीम ने बोर्ड से जवाब मांगा। बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह ने एक पत्र के साथ सभी सवाल दमयंती रावत को प्रेषित कर दिए हैं।
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बीते दिनों दमयंती रावत को कर्मकार बोर्ड के सचिव पद से हटा दिया गया था। इसके बाद सरकार ने बोर्ड भंग करते हुए वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत को भी अध्यक्ष पद से हटा दिया था। फिर बोर्ड में हुए वित्तीय लेन-देन का एजी ऑडिट शुरू हो गया। ऑडिट टीम ने सभी दस्तावेज खंगालने के बाद काफी आपत्तियां जताई हैं।
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इसमें ईएसआई अस्पताल के लिए 50 करोड़ का लोन स्वीकृत करने से लेकर कई और वित्तीय मामलों से संबंधित सवाल शामिल हैं। इन सभी आपत्तियों पर एजी टीम ने कर्मकार बोर्ड से जवाब मांगा है।
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कर्मकार बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह ने बताया कि चूंकि यह सभी आपत्तियां पूर्व सचिव दमयंती रावत के कार्यकाल की हैं, इसलिए सभी के जवाब देने के लिए उन्हें पत्र भेज दिया गया है। अब वो ही बताएंगी कि किस नियम या शासनादेश के तहत क्या फैसला लिया गया है।
षणमुगम कमेटी ने मुख्य सचिव को सौंपी जांच रिपोर्ट
कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम पर कार्यदायी संस्था को करोड़ों रुपये की धनराशि कर्मकार बोर्ड से देने के मामले में तत्कालीन सचिव दमयंती रावत विशेष जांच के घेरे में आ सकती हैं। इस मामले की जांच कर रही समिति ने दमयंती समेत कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। प्रभारी सचिव डॉ. वी.षणमुगम ने जांच रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंप दी है। अब मुख्य सचिव को रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई करनी है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में ईएसआई के तत्कालीन निदेशक डॉ.नरेश कुमार, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आकाशदीप व बीएम सेमवाल की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में इन सभी अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कराने के साथ विशेष जांच की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यदायी एजेंसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम पर चुनी गई थी, लेकिन उसे सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के लिए कर्मकार बोर्ड से 20 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन स्तर से प्रशासनिक और वित्तीय अनुमति न लिए जाने को लेकर भी प्रश्न खड़े किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट मुख्य सचिव के पास पहुंच गई है। हालांकि उन्होंने अभी इस रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं लिया है।
कर्मकार बोर्ड की हो सकती है एसआईटी जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच अधिकारी डॉ.वी षणमुगम की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन कर्मकार बोर्ड की एसआईटी जांच का निर्णय ले सकता है। बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल पहले ही अमर उजाला से बातचीत में कर्मकार बोर्ड की उच्च स्तरीय जांच की बात कर चुके हैं।