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उत्तराखंड : वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के लिए बन रही एसओपी, टाइगर रिजर्व और वन विभाग की ली जा रही मदद

Sat, 12 Dec 2020 09:50 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Dec 2020 09:50 AM IST
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uttarakhand news :  first time SOP for wild animals in uttarakand
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)

उत्तराखंड के जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व समेत देश के सभी टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्यों में वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ एसओपी तैयार करने में जुट गए हैं। वन्यजीवों की मौतों को लेकर भी विशेषज्ञ डाटा तैयार कर रहे हैं। 

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केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के ‘नेशनल वाइल्डलाइफ  एक्शन प्लान’ के तहत वन्यजीवाें के संरक्षण को लेकर तैयार की जा रही है। एसओपी में भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के अलावा नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी, इंडियन वेटरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली जैसे केंद्रीय संस्थानों के अलावा सभी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, सभी राज्यों के वन विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों की मदद ली जा रही है।
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देश के सभी टाइगर रिजर्व व वन्यजीव अभ्यारण्यों में हर साल तमाम वन्यजीवों की मौत बीमारियों से हो जाती है। हालांकि वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने व उनके इलाज के लिए तमाम टाइगर रिजर्व में प्रशिक्षित डॉक्टरों की तैनाती के साथ ही पुनर्वास केंद्र सेंटर खोले गए हैं। लेकिन इसके बावजूद कई बार वन्यजीवोें को बीमारियों से बचाने के प्रयास विफल साबित होते हैं।
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भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन के मुताबिक वैसे तो वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं। यदि किसी भी राज्य में वन्यजीवाें में किसी खास तरह की बीमारी का हमला होता है तो संस्थान के विशेषज्ञों की टीमें भेजी जाती हैं। संस्थान के विशेषज्ञों की टीम एसओपी को लेकर काम कर रही है।


जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व समेत राज्य के सभी वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों को बीमारियों से बचाने को लेकर तमाम एहतियाती कदम उठाए गए हैं। वन्यजीवों के इलाज को प्रशिक्षित डॉक्टरों की तैनाती के साथ ही पुनर्वास सेंटर भी बनाए गए हैं। नेशनल वाइल्डलाइफ  एक्शन प्लान के तहत एसओपी पर भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों की अगुवाई में काम किया जा रहा है।
- जेएस सुहाग, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड वन विभाग

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