हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाले जान लें कि एक सिगरेट उन्हीं के लिए नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक है। इस संदेश के साथ एक इंजीनियर ने देहरादून में ‘बटरश’ अभियान शुरू किया है। खुद एक चेन स्मोकर से पर्यावरण कार्यकर्ता बने निरित दत्ता के मुताबिक सिगरेट के ये टोटे (सिगरेट फिल्टर) सेहत के लिए खतरनाक होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी प्लास्टिक से ज्यादा खतरनाक हैं। शुक्रवार रात दो बजे से निरित और उनकी पचास युवाओँ की टीम सिगरेट के टोटे इकट्ठा करने शहर के अलग-अलग हिस्सों में उतरी। देहरादून से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले निरित दत्ता और उनकी पचास लोगों की टीम शुक्रवार रात दो बजे से देहरादून के अलग-अलग हिस्सों में सिगरेट के टोटे इकट्टा किए। लगातार 24 घंटे चलने वाले इस अभियान में युवा व युवतियां दोनों ही शामिल हैं। निरित इससे पहले कोलकाता और बेंगलुरु में यह अभियान चला चुके हैं। कोलकाता में चलाए अभियान में निरित और उनकी टीम ने 24 घंटे में 23 हजार चार सौ सिगरेट के फिल्टर एकत्रित किए थे और अब 22 नवंबर को गोवा में भी यह अभियान चलाया जाएगा।
बटरश अभियान: चेन स्मोकर से पर्यावरण कार्यकर्ता बने निरित, अब पर्यावरण बचाने के लिए रात को निकलते हैं सड़कों पर
रेनू सकलानी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 13 Nov 2021 01:59 PM IST
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