उत्तराखंड: तहसीलदार से मारपीट मामले में शिक्षा मंत्री पर दर्ज मुकदमा वापस लेने का प्रार्थनापत्र खारिज
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उत्तराखंड के रुद्रपुर में तहसीलदार से मारपीट करने के मामले में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। सरकार की ओर से मुकदमा वापस लेने को लेकर दिए गए प्रार्थनापत्र को जिला कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
बता दें कि 25 अगस्त 2015 को गदरपुर के तत्कालीन तहसीलदार शेर सिंह ग्वाल ने तत्कालीन विधायक और वर्तमान में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय और उनके समर्थकों पर मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाया था। पुलिस ने मामले में अरविंद पांडेय सहित 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है। सरकार की ओर से 321 सीआरपीसी के तहत वाद वापसी का पत्र जिलाधिकारी को भेजा गया था। इसके बाद जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी के माध्यम से जिला न्यायालय में वाद वापसी का प्रार्थना पत्र दिया गया था।
शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने सुनवाई करते हुए वाद वापसी के प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दिवाकर पांडे ने वाद वापसी के प्रार्थना पत्र के खारिज होने की पुष्टि की है।
शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय को कोर्ट में बिताने पड़े थे छह घंटे
बता दें कि छह साल पहले गदरपुर में नेशनल हाईवे जाम करने के मामले में सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत से वारंट जारी होने के बाद शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय रुद्रपुर कोर्ट में पेश हुए थे। मंत्री के अधिवक्ता की ओर से जमानत के लिए लगाए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। जमानत के लिए मंत्री को कोविड-19 का टेस्ट कराने के साथ ही छह घंटे तक कोर्ट परिसर में रहना पड़ा था।
पट्टे की भूमि पर हुए निर्णय से नाखुश एक पक्ष के लोगों ने 25 अगस्त 2015 को गदरपुर के नायब तहसीलदार शेर सिंह गयाल के साथ मारपीट की थी। मामले में नायब तहसीलदार ने विधायक और वर्तमान में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय सहित कई लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इससे नाराज अरविंद पांडेय ने समर्थकों के साथ जुलूस निकालकर पुतला दहन करने के साथ नेशनल हाईवे जाम कर दिया था।