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उत्तराखंड : संघ के द्विवार्षिक चुनाव से पहले ही सचिवालय संघ के पदाधिकारियों में हुई रार

Thu, 03 Dec 2020 09:32 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 03 Dec 2020 09:32 AM IST
सार

  • कुछ पदाधिकारियों ने कहा, संविधान के विरुद्ध है सचिवालय सेवा से इतर कार्मिकों को संघ में शामिल किया जाना
  • सचिवालय संघ के महासचिव ने कहा, आम सभा के फैसले के आधार पर ही लिया गया है निर्णय
  • सात दिसंबर को फिर बुलाई गई है सचिवालय संघ की आम सभा

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Uttarakhand news: dispute between Secretariat union officials even before election
सचिवालय - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

विस्तार

उत्तराखंड सचिवालय संघ के द्विवार्षिक चुनाव से पहले ही पदाधिकारियों के बीच रार पैदा हो गई है। कुछ पदाधिकारियों ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि सचिवालय सेवा से इतर कार्मिकों को भी सदस्यता दी जा रही है। उन्होंने इस बाबत अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन को पत्र भेजा है। वहीं इसके जवाब में सचिवालय संघ के सचिव ने भी अपना पत्र अपर मुख्य सचिव को दिया है।

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दरअसल, हाल ही में सचिवालय संघ ने यह फैसला लिया है कि राज्य योजना आयोग, बजट निदेशालय, वित्त आयोग, अनुसूचित जाति-जनजाति नियोजन प्रकोष्ठ और राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी संघ में सदस्य होंगे। इस पर सचिवालय संघ के उपाध्यक्ष संदीप मोहन चमोला और पूर्व महासचिव एवं सदस्य प्रदीप पपनै ने विरोध जताया है।
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उन्होंने कहा है कि सचिवालय सेवा से इतर कार्मिकों को सदस्य बनाया जाना संविधान के विरुद्ध है। सचिवालय परिसर में गठित प्रकोष्ठ, इकाईयों में कार्यरत कार्मिक अलग-अलग विभागों और कैडर के हैं। उनकी सेवा शर्तें भी अलग हैं। इनके नियोक्ता भी सचिवालय प्रशासन से भिन्न हैं। उन्होंने कहा है कि सचिवालय संघ के संविधान में कोई परिवर्तन आम सभा के माध्यम से ही किया जा सकता है जबकि आम सभा में इस तरह का कोई प्रस्ताव पास ही नहीं किया गया।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। वह कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते हैं। इस पर सचिवालय संघ के सचिव राकेश जोशी ने कहा है कि 24 नवंबर को हुई बैठक में नए सदस्यों को लेकर फैसला हुआ था। इस प्रस्ताव पर पूर्व में आम सभा में अनुमोदन लिया जा चुका है।

उन्होंने यह भी कहा है कि जून में कार्यकारिणी का कार्यकाल पूरा हो रहा था लेकिन 18 अगस्त को आयोजित हुई आम सभा में यह फैसला लिया गया था कि कोविड को देखते हुए संघ की कार्यकारिणी का कार्यकाल यथावत रहेगा। इस संबंध में अगस्त महीने में कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं।


उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों या सदस्यों का आरोप संघ की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। लिहाजा, तय किया गया है कि सात दिसंबर को एक बार फिर सचिवालय संघ की आम सभा बुलाई जाएगी, जिसके लिए अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन से अनुमति मांगी गई है। वहीं, आरोप लगाने वाले पदाधिकारियों ने मांग की है कि सचिवालय संघ के इन बदलावों को अस्वीकार किया जाए।

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