फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand News: Disaster management team returned from Gangotri glacier and Told No lake has been built in Gomukh

गंगोत्री ग्लेशियर से रेकी कर लौटी आपदा प्रबंधन की टीम ने किया खुलासा, गोमुख में नहीं बनी है कोई झील

Sun, 29 Nov 2020 08:33 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 29 Nov 2020 08:33 PM IST
सार

  • हाईकोर्ट के आदेश पर रेकी करने पहुंची टीम
  • कहा, 2017 में नीला ताल टूटने से आए मलबे से जताई गई थी झील बनने की आशंका

विज्ञापन
Uttarakhand News: Disaster management team returned from Gangotri glacier and Told No lake has been built in Gomukh
आपदा प्रबंधन की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गंगा भागीरथी के उद्गम गंगोत्री ग्लेशियर के मुहाने गोमुख के पास जमा भारी मलबे से झील बनने की आशंका को लेकर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और गंगोत्री नेशनल पार्क की टीम ने गोमुख पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

विज्ञापन


गोमुख का निरीक्षण कर लौटी टीम के अनुसार गोमुख में कोई झील नहीं बनी है। यहां वर्ष 2017 में नीला ताल टूटने से आया भारी मलबा जमा होने से नदी का प्रवाह पथ बदल गया है।वर्ष 2017 में गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में नीला ताल टूटने के कारण पानी के साथ भारी मलबा आकर ग्लेशियर के मुहाने गोमुख में पसर गया था।
विज्ञापन



मामले में दिल्ली निवासी अजय गौतम ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर गोमुख में झील बनने और इससे खतरे की आशंका जताते हुए जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने बीते 17 नवंबर को उत्तराखंड शासन को क्षेत्र की रेकी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


आपदा सचिव के निर्देश पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन की टीम गठित कर उसे रेकी के लिए गोमुख भेजा गया था। बीते 25 नवंबर को उत्तरकाशी से रवाना हुई 17 सदस्यीय टीम 26 तारीख को उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण गंगोत्री में ही फंस गई थी।

टीम 27 नवंबर को गंगोत्री से चलकर भोजवासा पहुंची

बर्फबारी थमने पर टीम 27 नवंबर को गंगोत्री से चलकर भोजवासा पहुंची। अगले दिन टीम ने गोमुख पहुंचकर हालात का जायजा लिया। रविवार रात को यह टीम लौट आई है। टीम के सदस्यों ने गोमुख में झील बनने की आशंका और यहां जमा मलबे से खतरे का आंकलन किया।

टीम अब शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। गंगोत्री नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार ने बताया कि टीम को गंगोत्री से आगे डेढ़ से ढाई फीट बर्फ से ढके ट्रैक को लांघ कर गोमुख पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

गोमुख में भी इस समय तीन फीट से ज्यादा बर्फ है। वहां पर कोई झील नहीं है। टीम में भूवैज्ञानिक सुशील खंडूड़ी, रेंजर प्रताप पंवार, आपदा प्रबंधन के मास्टर ट्रेनर चैन सिंह रावत एवं मस्तान भंडारी आदि शामिल रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed