उत्तराखंडः सरकारी अस्पतालों में मरीजों के खाने पर संकट, कैंटीन का 60 लाख रुपये बकाया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून जिले के तीन सरकारी अस्पतालों में मरीजों के खाने का संकट खड़ा हो सकता है। मरीजों के खाने का ही इन तीन अस्पतालों पर 60 लाख रुपये बकाया हो गया है। एक साल से अधिक समय से बकाया भुगतान न होने के कारण कैंटीन संचालक ने अब खाने की गुणवत्ता बरकरार रखने में असमर्थता जताई है। ऐसे में मरीजों को पौष्टिक आहार मिलने में मुश्किल होने की आशंका है।
दरअसल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, राजकीय जिला अस्पताल के कोरोनेशन व गांधी शताब्दी अस्पताल में तीन जबकि सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीजों को अन्य विभिन्न सरकारी अस्पतालों की तरह सरकार की ओर से तीन वक्त का खाना और एक बार की चाय दी जाती है।
इसके लिए सरकार ने अस्पतालों के माध्यम से जारी निविदा के जरिए निजी कैंटीन संचालक को जिम्मा दिया हुआ है। दून अस्पताल में तो कोविड-19 के मद से बजट उपलब्ध होने से समय पर भुगतान किया जा चुका है। जबकि, कोरोनेशन, गांधी शताब्दी अस्पताल का डेढ़ साल से लगभग 40 लाख रुपये और सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र का पिछले एक साल से 20 लाख रुपये का बकाया हो चुका है।
संबंधित अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नोटिस भेजा
इन अस्पतालों का भुगतान अभी लटका हुआ है। इसे लेकर कैंटीन संचालक कृष्ण बल्लभ ने संबंधित अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नोटिस भेजा है। जिसमें भुगतान नहीं होने की स्थिति में खाने की गुणवत्ता बनाए रखने में असमर्थता जताई है। प्रदेश की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि चार दिन पहले ही महानिदेशालय से सभी अस्पतालों का बजट जारी कर दिया गया है।
यह रहता है खाने का मैन्यू
कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ते में दूध, ब्रेड, मक्खन, जबकि दोपहर और रात के वक्त दाल, चावल, रोटी, एक सब्जी, फल या अंडा दिया जाता है। सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भी तीन वक्त का यही मैन्यू रहता है। सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को दोपहर बाद तीन बजे चाय भी दी जाती है।
भर्ती मरीजों की स्थिति
कोरोना काल में भर्ती मरीजों की संख्या कम हुई है। आजकल कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल में औसतन 100-100 मरीज भर्ती रहते हैं। जबकि, सेलाकुई मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना औसतन 40 मरीज भर्ती रहते हैं।