पेयजल निगम की लापरवाही : उपभोक्ताओं को अब आठ महीने का पानी का बिल भरना होगा एक साथ
पेयजल निगम की लापरवाही देहरादून के आरकेडिया और ईस्ट होपटाउन के करीब 16 हजार उपभोक्ताओं पर भारी पड़ने वाली है। बिल नहीं बंटने के कारण उपभोक्ताओं को आठ महीने का बिल एक साथ भरना चुनौती भरा होगा।
दरअसल, आरकेडिया और ईस्ट होपटॉउन के कई क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था पहले जल संस्थान के हाथ में थी। यह क्षेत्र अब विश्व बैंक पोषित मेंहूवाला पेयजल क्लस्टर योजना में शामिल किए गए हैं। योजना का निर्माण पेयजल निगम कर रहा है।
जून 2020 में इन क्षेत्रों की पेयजल की संपूर्ण व्यवस्था जल संस्थान से जल निगम को सौंप दी थी। इसके बाद तय समझौते के अनुसार जुलाई तक के बिल जल संस्थान ने वसूल लिए। अगस्त के बाद से पेयजल निगम को पानी के बिलों की वसूली करनी थी, लेकिन अभी तक पिछले चार माह का बिल उपभोक्ताओं को नहीं भेजा गया है।
कार्मिशियल उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी
फरवरी में दिसंबर से मार्च तक के बिलों का वितरण होना है। बताया जा रहा है कि अभी तक पेयजल निगम की ओर से बिलों का प्रारूप ही तैयार नहीं किया और न ही वितरण की व्यवस्था की है। लिहाजा निगम की यह लापरवाही करीब 16 हजार उपभोक्ताओं पर भारी पड़ना तय है।
घरेलू उपभोक्ताओं का चार माह का बिल करीब 12 सौ रुपये आता है। इस लिहाज से कार्मिशियल उपभोक्ताओं का बिल काफी ज्यादा है। लिहाजा उन्हें आठ माह का एक साथ बिल भरने में आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं पेयजल निगम पहली बार बिलों का वितरण करेगा। लिहाजा बिलों का वितरण सही ढंग से होने पर भी संशय है।
बिलिंग की व्यवस्था को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है। बिलों के वितरण के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। जल्द ही कंपनी का चयन पानी के बिलों के वितरण की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। फरवरी में पिछले और नए बिलों का वितरण एक साथ शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
- केके रस्तोगी, जीएम पेयजल निगम, प्रभारी विश्व बैंक परियोजना