{"_id":"66938a403214cebf3c0e1d2c","slug":"uttarakhand-news-compensation-will-be-given-within-24-hours-in-case-of-disaster-2024-07-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: आपदा में 24 घंटे के भीतर मिलेगा मुआवजा, ब्लॉक स्तर पर बनाई गई टीमें, मौके पर जाकर करेंगी सर्वे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: आपदा में 24 घंटे के भीतर मिलेगा मुआवजा, ब्लॉक स्तर पर बनाई गई टीमें, मौके पर जाकर करेंगी सर्वे
Sun, 14 Jul 2024 02:03 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 14 Jul 2024 02:03 PM IST
सार
Uttarakhand News: आपदा के बाद जन हानि, पशु हानि या संपत्ति हानि होने पर सहायता धनराशि प्रभावितों तक 24 घंटे के भीतर मिलेगी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आपदा में हुए नुकसान का मुआवजा अब 24 घंटे के भीतर मिलेगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर टीमें गठित होंगी। वहीं पशुओं के मरने पर भी मौके पर ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा ताकि तत्काल मुआवजा या बीमे का लाभ मिल सके। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
सचिव विनोद सुमन ने कहा कि आपदा के बाद जन हानि, पशु हानि या संपत्ति हानि होने पर सहायता धनराशि प्रभावितों तक 24 घंटे के भीतर मिलेगी। इसके लिए उन्होंने सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर टीमें गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह टीम आपदा आने के तुरंत बाद मौके पर जाकर सर्वे कर नुकसान का आकलन करेगी।
विज्ञापन
उन्होंने ऊधमसिंह नगर जिले में बाढ़ प्रभावितों को सहायता राशि मुहैया कराने के लिए और अधिक टीमें गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीमा कंपनियों के स्तर पर क्लेम निस्तारण में विलंब का भी संज्ञान लिया। कहा कि बीमा कंपनियां तुरंत सर्वे कर क्लेम का निस्तारण करें, जिलों के स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए।
विज्ञापन
Dehradun News: गायब हो गई 700.30 एकड़ सरकारी जमीन, राजस्व दस्तावेजों में दर्ज नहीं कोई रिकॉर्ड
सचिव आपदा प्रबंधन ने निर्देश दिए कि आपदा के दौरान पशु मरने पर उसका मौके पर ही पोस्टमार्टम किया जाए। मृत पशु को पशु चिकित्सालय तक लाना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सभी डीडीएमओ को निर्देश दिए कि पशुपालन विभाग के साथ समन्वय बनाया जाए। पशु बीमा के मामलों में बीमा कंपनियों से भी समन्वय बनाया जाए।