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उत्तराखंड: वनाग्नि प्रबंधन के लिए एफआरआई में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

Thu, 18 Feb 2021 02:30 AM IST
अलका त्यागी अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून 
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून  Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 18 Feb 2021 02:30 AM IST
सार

  • केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहल पर संस्थान की ओर से भेजा गया प्रस्ताव
  • अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी की तर्ज पर वनाग्नि प्रबंधन के लिए तैयार किए जाएंगे अत्याधुनिक टूल्स

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Uttarakhand News: Center of Excellence Will be Established in FRI dehradun for forestry management
वन अनुसंधान संस्थान - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

देश के तमाम राज्यों में हर साल वनाग्नि से होने वाली तबाही को कम करने व वन्यजीवों के साथ ही वनसंपदाओं को बचाने के लिए वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में फॉरेस्ट फायर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने की तैयारी है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहल पर संस्थान निदेशक की ओर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मंत्रालय को भेज दिया गया है। 

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आईसीएफआरई महानिदेशक व वन अनुसंधान संस्थान निदेशक अरुण सिंह रावत के मुताबिक जिस तरीके से साल दर साल वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही हैं और इनमें वन्यजीवों के साथ ही वन संपदाओं को भारी नुकसान हो रहा है उसे देखते हुए देश में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। बताया कि फॉरेस्ट फायर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को धरातल पर उतारा जा सके, इसके लिए भारतीय वन सर्वेक्षण समेत कई संस्थानों के विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। 
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साथ ही अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी समेत विकसित देशों में वनाग्नि प्रबंधन में इस्तेमाल किए जा रहे टूल्स का भी अध्ययन किया जाएगा और उन्हीं की तर्ज पर टूल्स विकसित किए जाएंगे। साथ ही इनके बारे में विभागीय अधिकारियों व वनकर्मियों को जागरूक किया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही मंत्रालय की ओर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने को लेकर मंजूरी दी जा सकती है।

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वनाग्नि से हुए नुकसान का आकलन करेंगे वैज्ञानिक

निदेशक अरुण सिंह रावत ने बताया कि वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में वनाग्नि से वन्यजीवों के साथ ही वन संपदाओं को हुए नुकसान का भी आकलन करेंगे। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।

वनाग्नि संभावित क्षेत्रों का भी अध्ययन करेंगे वैज्ञानिक 
भारतीय वन सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की टीमें वनाग्नि के लिहाज से संवेदनशील इलाकों को सेटेलाइट के जरिए चिह्नित करती हैं, लेकिन अब वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की टीमें भी वनाग्नि के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का अध्ययन करेंगी। इतना ही नहीं वैज्ञानिकों की टीमें यह भी सुझाव देंगी कि संवेदनशील इलाकों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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