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उत्तराखंड : नीम की नई प्रजातियां विकसित कर रहे वनस्पति विज्ञानी, वन मंत्रालय ने सौंपी जिम्मेदारी
Thu, 24 Jun 2021 02:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:44 PM IST
सार
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक केंद्र सरकार के निर्णय के मुताबिक देश में यूरिया का उत्पादन करने वाली तमाम इकाइयों को यूरिया खाद बनाते समय नीम की कोटिंग करना अनिवार्य है।
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नीम का पेड़
- फोटो : Pixabay
विस्तार
नीम के अधिक से अधिक पेड़ों को लगाकर प्रदूषण पर नियंत्रण के साथ ही उच्च गुणवत्ता के तेल के लिए नीम की नई प्रजातियों को विकसित किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को सौंपी गई है। केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहल पर वैज्ञानिक पहले चरण में छह प्रजातियों को विकसित कर रहे हैं।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार के मुताबिक केंद्र सरकार के निर्णय के मुताबिक देश में यूरिया का उत्पादन करने वाली तमाम इकाइयों को यूरिया खाद बनाते समय नीम की कोटिंग करना अनिवार्य है। ताकि, यूरिया खाद का खेती से इतर अन्य जगहों पर दुरुपयोग न हो सके, लेकिन वनस्पति विज्ञानियों का मानना है कि उत्तराखंड समेत देश में नीम की जितनी प्रजातियां पाई जाती हैं, उनके तेल निकलने का प्रतिशत और कड़वाहट कम है।
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ऐसे में वनस्पति विज्ञानी ऐसी प्रजातियों को विकसित करने में जुटे हैं, जिनमें अधिक बीजों के साथ ही अधिक तेल का उत्पादन हो और उनके तेल में जादीरिफ़्टिन रसायन की मात्रा अधिक हो। ताकि, तेल अधिक कड़वा हो। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि छह नई प्रजातियों पर काम किया जा रहा है, जिसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। जल्द ही इस संबंध में केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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देश में होता है सात लाख टन तेल का उत्पादन
आंकड़ों पर नजर डालें तो फिलहाल देश में हर साल 35 लाख टन नीम के बीज के साथ ही सात लाख टन नीम के तेल का उत्पादन होता है। जबकि, साल 1980 में महज डेढ़ लाख टन नीम के तेल का उत्पादन होता था। आने वाले समय में नीम के तेल का उत्पादन और अधिक बढ़ेगा।
केरल से लेकर उच्च हिमालई क्षेत्रों तक पाया जाता है नीम
वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार नीम का पेड़ केरल से लेकर हिमालय की पहाड़ियों तक पाया जाता है। जबकि, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उड़ीसा समेत देश के मध्य भाग में भी नीम बहुतायत में पाया जाता है।
नीम के तेल का कई औषधियों में होता है प्रयोग
नीम का पेड़ बहुउद्देशीय होता है। नीम के तेल का इस्तेमाल मलेरिया, बुखार, दर्द और गर्भनिरोधक दवाइयां बनाने के साथ ही सौंदर्य प्रसाधन के सामानों में भी होता है। वहीं, नीम की लकड़ी का उपयोग फर्नीचर बनाने में भी होता है।