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Uttarakhand: रंग लाया पिथौरागढ़ की बबीता का जुनून, दो साल मेहनत कर गुलाब की खुशबू से महका दिए बंजर खेत

Tue, 04 Apr 2023 04:46 PM IST
अलका त्यागी दिनेश अवस्थी, अमर उजाला, देहरादून
दिनेश अवस्थी, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 Apr 2023 04:46 PM IST
सार

बबीता ने अपने चचेरे भाई कमलेश के सहयोग से खेतों को आबाद किया और खेती शुरू की। आज उनके बंजर खेत फूलों की खुखबू से महक रहे हैं।

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Uttarakhand News : Babita from Pithoragarh doing roses farming in  barren fields
गुलाब की खेती करने वाली बबीता सामंत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में कनालीछीना ब्लॉक के पसामा गांव की बबीता सामंत ने पति की इच्छा और अपने जुनून से बंजर खेतों को गुलाब की खुशबू से महका दिया है। दो साल पसीना बहाने के  बाद आज बंजर खेत गुलाब के पौधों से गुलजार हैं। इनकी खुशबू दूर- दूर के गावों को भी महका रही है।

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बबीता सामंत के अनुसार, मर्चेंट नेवी में तैनात कैप्टन महेंद्र सामंत का बचपन गांव में ही बीता। बंजर खेतों को देख उन्होंने इन्हें हराभरा करने की इच्छा साझा की। यह इच्छा कठिन जरूर थी लेकिन मुश्किल नहीं। बबीता ने अपने चचेरे भाई कमलेश के सहयोग से खेतों को आबाद किया और अदरक लगाया। 
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अदरक से 50 हजार की कमाई हुई। इसके बाद सीढ़ीनुमा खेतों में गुलाब की खेती का विचार आया। पावर ट्रिलर से खेतों की जुताई की गई। डेढ़ किमी दूर डांगटी गांव के स्त्रोत से पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचाया गया। गुलाब की खेती में राजेंद्र लाल , पसमा के बसंत सामंत, डांगती के ध्यान सिंह पोखरिया और बसंती पोखरिया सहयोग कर रहे हैं। 

ऐसे फैली गुलाब की महक 
- इस एक हेक्टेयर जमीन पर बुल्गारियन दमिस्क प्रजाति के गुलाब खिले हैं।
- संगध पौधा केंद्र (सीएपी) सेलाकुई के सहयोग से गुलाब के तीन हजार पौधे लगाए गए हैं।
- दमिस्क गुलाब की पंखुडियां 1500 से 1800 रुपये किलो तक बिकती हैं।
- इसके तेल का समर्थन मूल्य प्रति किलो साढ़े पांच लाख रुपये तक है।
- एक किलो तेल के लिए 40 से 50 क्विंटल तक फूलों की जरूरत होती है।

गुलाब जल की योजना
बबीता सामंत ने बताया कि उन्होंने एमएसएमई में दि हिमालयन हार्वेस्ट नाम से गुलाब जल का रजिस्ट्रेशन कराया है। सगंध पौधा केंद्र के जिला प्रभारी विजय प्रसाद वमोला ने बताया कि जल्द ही पसमा में गुलाब जल का मिनी आसवन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यहां की जलवायु गुलाब के लिए बेहद अनुकूल है।

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