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उत्तराखंड: पहाड़ों में इन दिनों खतरे से खाली नहीं यात्रा, भूस्खलन के 84 डेंजर जोन चिह्नित

Mon, 02 Aug 2021 08:35 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 02 Aug 2021 08:35 PM IST
सार

बता दें कि प्रदेश में इस समय करीब 84 डेंजर जोन (भूस्खलन क्षेत्र) सक्रिय हैं, जो आए दिन सड़कों को बाधित कर रहे हैं।

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Uttarakhand News: 84 danger zones marked for landslides in Hilly Area
पिथौरागढ़ हाईवे - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में यात्रा करना इन दिनों खतरे से खाली नहीं है। कब कौन सी सड़क पर पहाड़ से गिरकर मलबा और बोल्डर आ जाएं, कहा नहीं जा सकता है। प्रदेश में इस समय करीब 84 डेंजर जोन (भूस्खलन क्षेत्र) सक्रिय हैं, जो आए दिन सड़कों को बाधित कर रहे हैं। अकेले टिहरी जिला क्षेत्र में ऋषिकेश-गंगोत्री और बदरीनाथ हाईवे ऑलवेदर रोड के 150 किमी हिस्से में 60 डेंजर जोन चिह्नित किए गए हैं।

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इतना ही नहीं बारिश के कारण ऑलवेदर रोड कई स्थानों पर दरक रही है। इससे कार्यदायी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। चट्टानों से पत्थर गिरने का खतरा और सड़क के नदी की तरफ दरकने का ये सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में इन सड़कों पर यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। इधर, लोनिवि की माने तो विभाग की तरफ से सड़कों को खुला रखने की हर मुमकीन कोशिश की जा रही है। जरूरत के हिसाब से जेसीबी मशीनों और मजदूरों की तैनाती की गई है।
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उत्तराखंड: हर मौसम में ठप हो रही ऑलवेदर रोड, दरकते पहाड़ और भूस्खलन के कारण जानमाल का खतरा
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टिहरी: हाईवे पर भूस्खलन से तीन साल में नौ लोगों की जा चुकी जान
टिहरी जिले की सीमा में ऋषिकेश-बदरीनाथ और ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे हादसों का घोसला बनता जा रहा है। पिछले तीन सालों में हाईवे पर अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन होने से नौ लोग हमेशा के लिए अपनों से बिछुड़ चुके हैं। भूस्खलन की चपेट में आने से दस लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। दो आवासीय भवन भूस्खलन की चपेट में आने से जमींदोज हो चुके हैं।

ऋषिकेश से कीर्तिनगर के बीच हाईवे पर तोताघाटी, शिवपुरी, कौड़ियाला, सिंगटाली, महादेव चट्टी, देवप्रयाग वैलीमोड, ऋषिके-गंगोत्री हाईवे पर भद्रकाली से लेकर चिन्यालीसौड़ के बीच नरेंद्रनगर पुरानी चुंगी, बगड़धार, हिंडोलाखाल, ताछला, आमपाटा, डाबरी, किरगणी, अलेरू, रत्नौगाड़ सबसे अधिक डेंजर जोन बने हुए हैं। बारिश होते ही उक्त स्थानों पर चट्टान से भूस्खलन होने पर अक्सर मलबा और बोल्डर गिरने से हाईवे बाधित हो जाता है। चलते वाहन मलबे की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में लोग घंटों फंसे रहते हैं। कई बार लोगों को रात सड़क पर ही गुजारनी पड़ती है। हाईवे बाधित होने से पर्वतीय क्षेत्र में रसद, रसोई गैस, सब्जी की सप्लाई बंद हो जाती है। इस बाबत डीएम इवा आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि हाईवे पर बने डेंजर जोनों पर निरंतर मरम्मत कार्य चल रहा है। पहले की अपेक्षा स्थिति में काफी सुधार आया है। 

चमोली जिले में 13 भूस्खलन जोन सक्रिय

बदरीनाथ हाईवे पर चमोली जिले में करीब 13 भूस्खलन जोन सक्रिय हैं, जिस कारण अक्सर मलबा आने से हाईवे बंद हो जाता है। लामबगड़ के पास खचड़ा नाला, गोविंदघाट के पास टैया पुल, पागल नाला, सेलंग, गुलाबकोटी, हनुमान चट्टी के पास रडांग बैंड, भनेरपाणी, चाड़ातोक, क्षेत्रपाल, छिनका, चमोली चाड़ा, बाजपुर और कर्णप्रयाग के पास आए दिन मलबा आ जाता है। इसके अलावा अन्य जगह पर भी मलबा आने से हाईवे बंद हो जाता है। संपर्क मार्गों की स्थिति तो और भी बुरी है। इन दिनों जिले में करीब 24 संपर्क मार्ग बंद पड़े हैं। 

पौड़ी: भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील है पौड़ी
जनपद पौड़ी में आपदा की दृष्टि से भू-स्खलन के 119 स्थल चिन्हित किए गए हैं। जिला प्रशासन ने भू-स्खलन से प्रभावित या चिन्हित क्षेत्रों में यातायात सुचारु रखने के लिए 55 जेसीबी मशीनें तैनात की हैं। जनपद में यातायात से कोई भी क्षेत्र अलग या कटा नहीं है। जबकि भू-स्खलन क्षेत्रों में किसी तरह की कोई वाहन दुर्घटना भी नहीं हुई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी पौड़ी दीपेंद्र काला ने बताया कि जिलाधिकारी ने समस्त भू-स्खलन प्रभावित या चिन्हित स्थलों पर यातायात सुचारू किए जाने के लिए लोनिवि एनएच खंड, लोनिवि व पीएमजीएसवाई के साथ ही प्रशासन के अधिकारियों को जेसीबी की तैनाती के साथ ही अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जनपद में प्रभावित या संभावित भू-स्खलन क्षेत्रों में किसी तरह की वाहन दुर्घटनाएं नहीं हुई हैं और जिले का कोई भी क्षेत्र यातायात से अलग नहीं हुआ है।

रुद्रप्रयाग: ऑलवेदर के कार्य से उभरे नए डेंजर जोन
बरसात से ऋषिकेश-बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग बदहाल हो रखे हैं। ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत दोनों हाईवे के चौड़ीकरण से पहाडिय़ां कमजोर हो रखी हैं, जो हल्की बारिश में भी भरभरा कर ढह रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही एनएच और प्रशासन द्वारा तमाम दावों के बाद भी बरसाती मौसम में बचाव को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। ऑलवेदर रोड परियोजना में निर्माणाधीन ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर श्रीनगर से रुद्रप्रयाग के बीच 35 किमी क्षे में दर्जनभर डेंजर जोन सक्रिय हो गए हैं। पूरे हिस्से पर जगह-जगह पत्थर व मलबा के ढेर लगे हैं। साथ ही कब किस पहाड़ी से कितना बड़ा पत्थर गिर जाए, कहना मुश्किल है। सिरोहबगड़ में भूस्खलन जोन सक्रिय होने से एनएच की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं, नरकोटा के समीप पहाड़ी का लगभग सौ मीटर हिस्सा कमजोर हो रखा है, जिससे पिछले एक माह से हल्की बारिश में भी पत्थर व मलबा गिर रहा है। इधर, रैंतोती से नगरासू के बीच भी राजमार्ग पांच-छह स्थानों पर खतरनाक हो गया है। दूसरी तरफ 76 किमी रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे नैल, गबनी गांव, बांसबाड़ा, सेमी-भैंसारी, नारायणकोटी, चंडिकाधार, सेरशी व सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच अति संवेदनशील हो गया है। वहीं, तुंगनाथ घाटी को चमोली जिले से जोडऩे वाला कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-गोपेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी बरसात से उषाड़ा से दैड़ा के बीच भूधंसाव जोन सक्रिय होने लगे हैं। जिले में नेशनल हाईवे के खस्ताहाल होने के चलते बीते तीन वर्षों में अति संवेदनशील स्थानों पर दस से अधिक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें कई लोग हताहत हुए हैं। क्षेत्रीय जनता द्वारा डेंजर जोन पर स्थायी ट्रीटमेंट की मांग की जा रही है। लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।

उत्तरकाशी : मनेरा बाईपास पर नया भू स्खलन जोन सक्रिय
जनपद क्षेत्र में 16 जोन भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं। इसके अलावा 50 से 60 गांव ऐसे हैं जहां भू-स्खलन हुआ है। इनमें से कुछ स्थानों पर ट्रीटमेंट कर दिया गया है। वर्तमान में  मनेरा बाईपास पर भू-स्खलन का नया जोन सक्रिय हो रहा है। बीते कुछ दिनों से यहां पहाड़ी से लगातार बोल्डर और मलबा बड़ी मात्रा में गिर रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने बाईपास पर यातायात बंद कर दिया है।
उत्तरकाशी जनपद आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां बादल फटने व भूस्खलन की घटनाएं अक्सर सामने आती है। भू स्खलन की दृष्टि से प्रशासन ने जनपद में 16 जोन अतिसंवेदनशील घोषित किए हैं। जिनमें नगुण चिन्यालीसौड़, धरासू पुुराना थाना के पास, बंदरकोट (रतूड़ीसेरा), बंदरकोट (मालती), ओंगी (मनेरी), भाटुका सौड़, मल्ला, सुनगर भटवाड़ी, स्वारीगाड, हेल्गूगाड (गंगनानी), धरासू कल्याणी, तलोग, सिलाई बैंड, ओजरी (डबरकोट),ओरछा बैंड (डांडागांव), हनुमानचट्टी शामिल हैं। इसके अलावा बीते कुछ दिनों से मनेरा बाईपास रोड पर भी लगातार भू-स्खलन हो रहा है।जनपद में करीब 50 से 60 गांव ऐसे हैं जहां कभी भू-स्खलन हुआ है। वहीं पिछले 24 वर्षो से भू-धंसाव झेल रहे मस्ताड़ी गांव के ग्रामीण विस्थापन की मांग कर रहे हैं।  जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि ऐसे स्थानों का भू गर्भीय सर्वे कराया जा रहा है। अति संवेदनशील स्थानों पर संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक मात्रा में मशीनरी, निगरानी कर्ता व मजदूूरों की तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2003 में वरुणाव्रत पर्वत से खतरनाक भू-स्खलन हुआ था। इसमें बाजार क्षेत्र में कई बहुमंजिला होटल ध्वस्त हो गए थे। गनीमत रही थी कि जान का कोई नुकसान नहीं हुआ था। पर्वत का ट्रीटमेंट कर दिया गया है। हालांकि फिर भी कभी कभार बोल्डर गिरने की घटना होती रहती है।

चंपावत : जिले में 15 भूस्खलन जोन, तीन साल में सात की मौत

चंपावत जिले में भूस्खलन के 15 जोन हैं और यह सभी टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन बारहमासी रोड पर है। एनएच खंड के ईई एलडी मथेला का कहना है कि भारतोली, संतोला, स्वांला, धौन, बनलेख, अमोड़ी, अमरूबैंड सहित कुल 15 संवेदनशील जोन है। भूस्खलन वाले क्षेत्रों के ट्रीटमेंट के लिए डीपीआर भेजी गई है। वहीं, 2018 से अब तक इन क्षेत्रों में सात लोगों की मौत हो चुकी है। जनक्षति से बचने के लिए प्रशासन भूस्खलन वाली जगहों में पुलिस कर्मियों को तैनात कर आवाजाही करने वालों को सजग करता है। 

बागेश्वर : जिले में भूस्खलन संभावित 18 स्थान
थोड़ी सी बारिश होते ही जिले की सड़कें बंद हो जाती हैं। जिले में भूस्खलन से संभावित 18 जोन हैं। कहने को सड़कें खोलने के लिए 36 जेसीबी तैनात की गई हैं लेकिन सड़कों को खोलने की गति बेहद धीमी है। कपकोट से कर्मी जाने वाली सड़क 10 जुलाई को पुलिया क्षतिग्रस्त होने से बंद हो गई थी। इस सड़क पर अब तक यातायात बहाल नहीं हो सका है। आपदा राहत के लिए जिले में 16 अस्थायी हेलीपैड बनाए गए हैं। जिले में सुमगढ़, कुंवारी, मल्लादेश, सेरी, बड़ेत आदि गांव आपदा प्रभावित होने के कारण भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं। सुमगढ़ के ऐठाणवण तोक में भूस्खलन से एक मकान पिछले दिनों जमींदोज हो गया था। दंपती और उनके पुत्र की मौत हो गई थी। वर्ष 2010 में इसी क्षेत्र में भुस्खलन से 18 स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी।  

अल्मोड़ा : तीन मोटर मार्गों पर बने हैं भूस्खलन जोन
अल्मोड़ा जिले में मोटर मार्गों पर कुल तीन भूस्खलन जोन हैं। बारिश में बार-बार भूस्खलन से वाहनों के आवागमन में दिक्कतें आती हैं। कई बार नैनीताल, पिथौरागढ़ जैसे जिलों से कई घंटों तक यातायात बाधित रहता है। गनीमत यह है कि अभी तक भूस्खलन की वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि रानीखेत-रामनगर मोटर मार्ग पर टोटाम, अल्मोड़ा-धौलछीना मोटर मार्ग पर कसाड़ बैंड और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मकड़ाऊ के तीन भूस्खलन जोन चिह्नित हैं। मोटर मार्गों पर बने इन जोनों से निपटने के लिए विभाग प्रयास करते रहते हैं। बारिश के दिनों में भूस्खलन का खतरा रहता है। उस दौरान मोटर मार्गों पर जेसीबी, पोकलैंड आदि मशीनें तैनात रहती हैं। 

पिथौरागढ़ : चट्टानें दरकने से पांच लोगों की जा चुकी हैं जान
पिथौरागढ़ जिले में पिथौरागढ़-तवाघाट रूट सबसे अधिक खतरनाक है। इसमें घाट से पिथौरागढ़ के बीच करीब 17 स्थान ऐसे हैं जहां पर पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। इसके बाद सबसे अधिक खतरा धारचूला के तवाघाट से लिपुलेख मोटर मार्ग में रहता है। चट्टानें दरकने की अलग-अलग घटनाओं में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। तवाघाट से लिपुलेख सड़क पर मई 2021 में चट्टान दरकने से एक ट्राला क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई थी। इस सड़क में पिछले तीन वर्षों के दौरान पांच से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। घाट से पिथौरागढ़ तक 17 स्थानों पर खतरा बना हुआ है। वर्ष 2020 से अब तक इस सड़क में पहाड़ी दरकने की 25 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि इन घटनाओं में जनहानि नहीं हुई है। थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग में नाचनी के नयाबस्ती, हरड़िया, रातीगाड़, गिनी बैंड, बिर्थी, बनीक, रातापानी, पातलथौड़ में डेंजर जोन हैं। एनएच विभाग की ओर से डेंजर जोन का ट्रीटमेंट करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। 

ऊधमसिंहनगर : नहीं हैं कोई भूस्खलन जोन
ऊधमसिंहनगर जिले का पूरा इलाका तराई का है। ऐसे में यहां भूस्खलन का कोई जोन नहीं है लेकिन बाढ़ एवं जलभराव की दृष्टि से जिला संवेदनशील है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाढ़ और जलभराव की दृष्टि से 52 गांव अतिसंवेदनशीन, 68 ग्राम संवेदनशील हैं। भारी बारिश होने पर ग्राम उकरौली, दाह,ढांकी, मेहरबाननगर, मजगहमी, गांगी, कोपा, रोशनपुर गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है।  उकरौली को छोड़कर अन्य गांवों में आपदा के समय नावों से ग्रामीणों तक आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। उकरौली के लोगों को ग्राम कल्याणपुर में आवासीय पट्टे वाली भूमि उपलब्ध कराई जाती है।

नैनीताल : बारिश के दौरान बार-बार भूस्खलन पहुंचाता है बाधा
मानसून के सीजन में पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। यहां लगातार बारिश होने पर कई जगह भूस्खलन होता है। आपदा प्रबंधन अधिकारी शैलेश कुमार के मुताबिक जिले में कुल 120 भूस्खलन जोन चिह्नित किए गए हैं, जिनमें 90 क्रॉनिक जोन हैं, जहां बारिश के दौरान बार-बार भूस्खलन होता है। जिले में भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग में कैंची से खैरना तक, भीमताल-रानीबाग रोड में सलड़ी और ज्योलीकोट-नैनीताल रोड में हनुमान मंदिर के पास बल्दियाखान सबसे खतरनाक क्रॉनिक जोन है। जहां हर साल बरसात में भूस्खलन होता है। इसका सीधा असर पर्वतीय क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर पड़ता है।

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