उत्तराखंड: 12 दिन में 4197 लोगों का हुआ अंतिम संस्कार, 1523 कोरोना संक्रमित भी शामिल
नोडल अधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 20 अप्रैल से एक मई तक 1348 और दो मई को 175 लोगों का अंतिम संस्कार कोविड से संबंधित श्मशान घाट या कब्रिस्तानों में किया गया। यानी 12 दिन में 1523 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।
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कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते प्रकोप के बीच शासन ने पिछले कुछ दिनों के अंतिम संस्कार के आंकड़े जारी किए हैं। इसमें एक ओर जहां श्मशान घाटों पर होने वाले अंतिम संस्कार शामिल हैं तो दूसरी ओर कब्रिस्तानों में दफनाए जाने वाले लोगों की संख्या भी शामिल की गई है।
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नोडल अधिकारी विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्रदेश के 91 निकायों में 295 कब्रिस्तान और श्मशान घाट हैं, जिनमें प्रतिदिन 1531 के अंतिम संस्कार की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि 20 अप्रैल से एक मई तक 1348 और दो मई को 175 लोगों का अंतिम संस्कार कोविड से संबंधित श्मशान घाट या कब्रिस्तानों में किया गया। यानी 12 दिन में 1523 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया।
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कोविड से संबंधित घाटों पर सामान्य मर्जों में मृत्यु होने पर भी मरीजों का अंतिम संस्कार किया गया है। इसके तहत 20 अप्रैल से एक मई तक 2402 और दो मई को 272 यानी कुल 2674 की अंत्येष्टि की गई। उन्होंने बताया कि कोविड मरीजों को मिलाकर प्रदेश में 20 अप्रैल से दो मई यानी 12 दिन के भीतर कुल 4197 लोगों का अंतिम संस्कार श्मशान घाट या कब्रिस्तानों में किया गया।
एक मई को कुल 130.8 टन लकड़ी का प्रयोग श्मशान घाट में किया गया। करीब 529.45 टन लकड़ी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जिन कब्रिस्तान या श्मशान घाट में किसी संस्था या ट्रस्ट की ओर से संचालन नहीं किया जाता है, वहां शवों के अंतिम संस्कार के लिए नगर निकायों को अधिकृत किया गया है।
कोरोना के चलते अनाथ हुए बच्चों की सूचना उपलब्ध कराए सरकार: आयोग
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश सरकार से ऐसे बच्चों की सूचना उपलब्ध कराने को कहा है। जिनके अभिभावकों की कोविड संक्रमण के चलते मौत हो गई है। आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि ऐसे बालक जिनके माता-पिता दोनों की कोरोना की वजह से मौत हो गई है या वे अस्पताल में भर्ती हैं।
उनकी सूचना जिला बाल कल्याण समिति एवं बाल आयोग को उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा बाल संरक्षण गृहों में आने वाले नए बच्चों के लिए अलग से एक कमरा आइसोलेशन के लिए आरक्षित किया जाए।
बाल संरक्षण गृहों में एक ऑक्सीजन सिलिंडर और 10 कोरोना किट उपलब्ध कराए जाएं। जबकि संक्रमित बच्चों के लिए कोविड अस्पतालों में चाइल्ड वार्ड की व्यवस्था की जाए।